
कोंटा से लौटकर दाक्षी साहू की रिपोर्ट @भिलाई. आजादी के बाद दक्षिण भारत में जिस पोलावरम बांध की नींव रखी गई उसके सैलाब में डूबने का डर कोंटावासियों को एक दो नहीं बल्कि 60 सालों से सता रहा है। आलम ये है कि बांध के डूबान क्षेत्र में आने वाले कोंटा और 18 ग्राम पंचायत के लगभग 40 हजार लोगों ने आज तक अपने घरों की छत पक्के सीमेंंट से नहीं ढाला। यही कारण है कि सरकारी भवन के अलावा यहां हर घर की छत खपरैल, सीमेंट शीट या घास-फूस से ढकी नजर आती है। कोंटा के मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को दोरला आदिवासियों की ही तरह सबकुछ उजडऩे की बात सोचकर रात में नींद नहीं आती। ये बातें पत्रिका की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई। जब उनसे पोलावरम बांध और उससे होने वाली त्रासदी के विषय में पूछा गया।
पड़ोसी राज्य में मुआवजा बंटा, यहां आज तक नहीं पहुंचा सरकारी कागज
छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे आंध्रप्रदेश में बन रहे पोलावरम बांध की चपेट में आने वाले लोगों को एक साल पहले तीसरी बार मुआवजा बांटा गया है। कोंटा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुधीर पांडेय ने बताया कि सीम्रांध में प्रति एकड़ प्रभावितों को लगभग 10.8 लाख मुआवजा बांटा गया है। यहां रमन सरकार की बेरूखी से डूबने वाले लोगों के पास आज तक एक सरकारी कागज भी नहीं पहुंचा। राज्य सरकार १७ सालों से कोंटावासियों को गुमराह कर रही है। इसलिए लोग अपने घर तो पक्का बनाते हैं, लेकिन छत कच्चा छोड़ देते हैं। पता नहीं किस दिन उजड़ जाए।
जिनकी जमीन डूबेगी उनसे आज तक पूछा भी नहीं फिर कैसा सर्वे
कोंटा नगर पंचायत अध्यक्ष मौसम जया ने सरकार की नियत पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार वनवासी क्षेत्र में 5 वीं अनुसूची लागू है। ऐसे में बिना आदिवासियों की राय जाने सरकार उनके जमीन का एक इंच तक अधिग्रहण नहीं कर सकती। फिर उनसे पूछे बगैर सर्वे की अनुमति कैसे दे दी। इससे लोगों का डर और भी ज्यादा बढ़ गया है। सीपीआई के ब्लॉक अध्यक्ष रमना राव ने बताया कि यहां लोग आंदोलन तो कर रहे, लेकिन नतीजा क्या निकलेगा किसी को नहीं पता। ४० साल से यही सब चल रहा बांध किसी का बन रहा और नुकसान किसी और को झेलना पड़ेगा।
आरटीआई में नहीं मिला जवाब
पोलावरम बांध के डूबान क्षेत्र और मुआवजा को लेकर बीजेपी के जिला सदस्य उदय राज सिंह और उनके साथियों ने कोंटा के स्थानीय निवासी होने के नाते आरटीआई लगाकर राज्य सरकार से जवाब मांगा। विडंबना देखिए प्रशासन का कोई भी अधिकारी इस विषय में जवाब देने को तैयार नहीं है। उन्हें इस संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं होने की बात कही गई है।
बंगाली समाज व्यापारी संघ के देवाशीष रॉय ने बताया कि पोलावरम एक नाम नहीं हउवा बन गया है। पीढ़ी दर पीढ़ी कोंटा के लोग सुनते आ रहे हैं, पोलावर आएगा सबकुछ उजड़ गया। सरकार खुद ये स्थिति क्यों स्पष्ट नहीं करती। लोग आते हैं विरोध, धरना प्रदर्शन करते हैं और चले जाते हैं। हम जिस डर के साए में जी रहे वो ६० साल से आज भी हमारा काल बनकर खड़ा है।
Published on:
26 Nov 2017 12:22 pm
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