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प्राइवेट स्कूलों ने नोटिस छपवाकर मांगी फीस और कहा नहीं दी तो बच्चों को कर देंगे ऑनलाइन स्कूल से बाहर

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने समाचार पत्रों में वैधानिक नोटिस प्रकाशित करा पालकों को 9 सितंबर तक फीस जमा करने का सार्वजनिक नोटिस दे दिया।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Sep 08, 2020

प्राइवेट स्कूलों ने नोटिस छपवाकर मांगी फीस और कहा नहीं दी तो बच्चों को कर देंगे ऑनलाइन स्कूल से बाहर

प्राइवेट स्कूलों ने नोटिस छपवाकर मांगी फीस और कहा नहीं दी तो बच्चों को कर देंगे ऑनलाइन स्कूल से बाहर

भिलाई. लॉकडाउन के साथ ही बंद हुए स्कूल और शुरू हुई ऑनलाइन क्लास के बाद स्कूल मैनेंजमेंट लगातार पालकों से फीस मांग रहा है। हद तो तब हो गई जब छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने समाचार पत्रों में वैधानिक नोटिस प्रकाशित करा पालकों को 9 सितंबर तक फीस जमा करने का सार्वजनिक नोटिस दे दिया। साथ ही फीस जमा न करने की स्थिति में ऑनलाइन क्लास से वंचित किए जाने की बात उसमें लिख दी। इस नोटिस के प्रकाशित होने के बाद पालक भी आक्रोश में आकर हाईकोर्ट का हवाला देकर फीस जमा नहीं करने की बात कह रहे है। वहीं शिक्षा विभाग कुछ बोलने की स्थिति में ही नहीं है।

विभाग का कहना है कि पालकों और स्कूल प्रबंधन को आमने सामने बात कर इस मामले को सुलझाना चाहिए। स्कूल प्रबंधन, पालक और शिक्षा विभाग के बीच अब यह मुद्दा बड़े विवाद का रूप ले रहा है। सबके अपने तर्क है और सभी अपनी बात को सही बता रहे हैं। इन सब के बीच विभाग, हाईकोर्ट के फैसले और आरटीई एक्ट का हवाला देकर सभी अपनी बात मनवाने आतुर है। इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन में दुर्ग-भिलाई के 26 स्कूल सदस्य है और यहां करीब 60 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं।

स्कूल ने कहा- पालक मिले तो बात बने
इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि कोविड-19 की वजह से आई आर्थिक दिक्कतों से वे भी जूझ रहे हैं। वे पालकों की भी स्थिति समझ रहे हैं,लेकिन अगर बार-बार पालक नोटिस को इग्नोर करेंगे तो उसका मतलब स्कूल प्रबंधन क्या समझे? अगर किसी को वाकई दिक्कत है तो वह स्कूल जरूर आएगा और अपनी बात रखेगा। जिसके बाद प्रबंधन भी उनकी मदद को तैयार होगा। इसलिए नोटिस में यह उल्लेख है कि जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, वे आकर मिले या लिखित में जानकारी दें। पर जो पालक सक्षम होते हुए भी जानबूझकर फीस नहीं दे रहे हैं, उनके बच्चों को क्लास से हटाने के अलावा दूसरा रास्ता ही नहीं बचता।

पालकों ने कहा- हाईकोर्ट का आदेश अच्छे से पढ़ें
स्कूल प्रबंधन की ओर से मांगी गई फीस के जवाब में छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के सदस्यों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश को प्रबंधन अच्छे से पढ़े। उसमें कोर्ट ने स्कूलों को समूचित व्यवस्था करने कहा है। साफ है अगर ऑनलाइन क्लास चल रही है तो मोबाइल से लेकर नेट रिचार्ज तक स्कूल करा दें, उसके बाद वह अधिसूचित फीस ले सकता है। जब पालक ही सारी व्यवस्था कर रहा है तो स्कूल को किस बात की फीस दी जाए? रही बात स्कूल से निकालने की तो, हाईकोर्ट के आदेश में यह कही नहीं लिखा कि जो बच्चे फीस नहीं दे रहे हैं उन्हें स्कूल से निकाला जाए?

पहले कर्तव्य निभाएं, फिर मांगे अधिकार
शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई एक्ट में पालकों के अधिकार और कर्तव्यों की व्याख्या की गई है। अगर प्रबंधन ऑनलाइन क्लास नहीं लेता और फीस मांगता तो गलत था, लेकिन शिक्षक मेहनत कर रहे हैं तो पालकों को भी फीस देनी चाहिए। लेकिन इस जगह स्कूल प्रबंधन भी गलत है कि फीस नहीं देने की स्थिति में वे बच्चों को ऑनलाइन क्लास से हटा देंगे। विभाग का कहना है कि समाचार पत्र में प्रकाशित नोटिस पूरे राज्य के स्कूलों की ओर से हैं। इस पर कार्रवाई का अधिकार राज्य स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से ही लिया जाएगा।

फीस से ही वेतन देते हैं
स्कूल प्रबंधन पालकों से मिली फीस से ही वेतन देते हैं। स्कूल बंद होने के बाद खड़ी बसों पर टैक्स, इंश्योरेंस, टीचिंग, नॉनटीचिंग स्टॉफ का पेमेंट सब कुछ रूका हुआ है। पालक जिस तरीके से फीस देना चाहते हैं, प्रबंधन उसके लिए भी तैयार है,लेकिन वे अगर सामने आकर बात नहीं करेंगे तो इसे क्या समझा जाए?
एसके उमक, सचिव, इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन दुर्ग-भिलाई

स्कूलों के खिलाफ हो एफआईआर
स्कूल प्रबंधन ने सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर आरटीई एक्ट की धज्जियां उड़ाई है। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर इसका विरोध किया जाएगा। इस मामले को लेकर मंगलवार को कलक्टर और एसपी को ज्ञापन देंगे और कार्रवाई नहीं हुई तो पालक सड़क पर आकर आंदोलन करेंगे।
नजरूल खान, प्रदेशाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ छात्र-पालक संघ

स्कूल करें एक्ट का पालन
हाईकोर्ट के आदेशानुसार स्कूलों को फीस लेने का अधिकार है, लेकिन अगर कोई पालक फीस नहीं दे पा रहा है तो उसके बच्चे को क्लास से नहीं हटाया जा सकता। अगर स्कूल प्रबंधन ऐसा करते हैं तो यह आरटीई एक्ट का उल्लंघन है।
प्रवास सिंह बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग

फैक्ट फाइल
इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन में सदस्य स्कूल- 26
इन स्कूलों में छात्रों की संख्या- 60 हजार से ज्यादा
अब तक इन स्कूलों में बकाया फीस- 75 फीसदी
इन स्कूलों में कार्यरत टीचिंग, नॉनटीचिंग स्टाफ - करीब 5 हजार