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Proud of Chhattisgarh: 15 की उम्र में अमरीका तक लंबी छलांग, नासा के साथ काम करेगी गांव की बेटी

विश्वेशा अभी सिर्फ 10 वीं में है, पर अमरीका ने उनकी काबिलियत को पहचानकर यह मौका दिया है। यह होनहार शनिवार को अमरीका के लिए रवाना हुई है।

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Proud of Chhattisgarh: 15 की उम्र में लंबी छलांग, नासा के साथ काम करेगी गांव की बेटी

भिलाई.दुर्ग से 8 किलोमीटर दूर ग्राम कोलिहापुरी। ढाई हजार की आबादी वाला गांव। यह भले ही शहर के किनारे पर बसता है, लेकिन यहां रहने वाले होनहार देश-दुनिया में कदम जमाने की चाह रखते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है इस गांव की बेटी विश्वेशा हरमुख ने। सिर्फ 15 साल की इस बिटिया का चयन अमरीका स्पेस एजेंसी, नासा के लिए हुआ है। वह एयरोस्पेस प्रोजेक्ट में शामिल की गईं हैं।

अमरीका ने रिसर्च और पढ़ाई के लिए 10 साल का एजुकेशन वीजा दिया

प्रदेश के लिए हर्ष की बात इसलिए भी है कि क्योंकि इस छोटी उम्र में विश्वेसा को अमरीका ने रिसर्च और पढ़ाई के लिए एक-दो नहीं बल्कि 10 साल का एजुकेशन वीजा दिया है। विश्वेशा ने अपनी 8 वीं तक की स्कूलिंग दुर्ग डीपीएस से की है, जबकि नवमीं से उन्होंने देहरादून के यूनिसन वल्र्ड स्कूल में दाखिला लिया। विश्वेशा अभी सिर्फ 10 वीं में है, पर अमरीका ने उनकी काबिलियत को पहचानकर यह मौका दिया है। यह होनहार शनिवार को अमरीका के लिए रवाना हुई है।

रिसर्च पर फोकस, आईएफएस है सपना
विश्वेशा के पिता केशव बंटी हरमुख ने बताया कि बिटिया बचपन से ही विदेश यात्रा और स्पेस साइंस को लेकर सवाल पूछा करती थी। ८वीं से ही विश्वेशा ने तय कर लिया है कि उन्हें भारतीय विदेश सेवा यानि आईएफएस अधिकारी बनना है। इसके लिए उन्होंने 10वीं से अपने स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी है।

मां बनकर पाला पिता ने

छोटी उम्र में ही विश्वेशा के सिर से मां नम्रता का साया उठ गया। पिता बंटी हरमुख ने अपनी बिटिया को मां बनकर पाला। पूरे परिवार ने उनकी परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी ख्वाहिशों को पंख देने के लिए देहरादून के स्कूल में दाखिला करवाया। विश्वेशा शुरू से ही साइंस में अव्वल रही है। उन्होंने कई साइंस ओलंपियाड में भी पार्टिसिपेट कर बड़े पुरस्कार जीते हैं। बंटी हरमुख ने बताया कि उनकी बिटिया को यह मौका साइंस में बेहतर प्रदर्शन के लिए ही मिला है। स्कूल के हजारों छात्रों में से १५ छात्रों को नासा के प्रोजेक्ट में जगह मिली है।

इस तरह है उनका नासा भ्रमण
नासा ने विश्वेशा को स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए चयन किया है। वह फिलहाल १५ दिनों तक अमरीका में रहकर स्पेस की बारीकियां समझेंगी। एयरोस्पेस के कई रहस्य जानने का मौका मिलेगा। इसके बाद आगे के १० साल तक वह एयरोस्पेस में रिसर्च कर पाएंगी। अमरीका के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले रहेंगे। उन्हें अलग से कोई वीजा के लिए अप्लाई नहीं करना होगा।