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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बालसखा सांसद शिवेंद्र बहादुर सिंह लोकसभा की वेबसाइट से गायब

अपने चाहने वालों में शिबू के नाम से चर्चित शिवेन्द्र बहादुर सिंह का जन्म 7 जनवरी 1943 को नागपुर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दून स्कूल में हुई।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 31, 2017

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राजनांदगांव. यहां से लगातार दो बार लोकसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले इकलौते नेता तीन बार के सांसद शिवेन्द्र बहादुर सिंह के संबंध में किसी तरह की जानकारी लोकसभा की वेबसाइट में उपलब्ध नहीं है। यह अपने आप में सवाल खड़ा करने वाला मसला है कि राजनांदगंाव लोकसभा क्षेत्र से सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतने वाले और अपने दौर में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले नेता का कोई रिकॉर्ड संसद के पास नहीं है।

खैरागढ़ राजपरिवार के युवराज और दबंग नेता शिवेन्द्र बहादुर सिंह की कल 31 दिसम्बर को पुण्यतिथि है। इस मौके पर जब पत्रिका ने लोकसभा की वेबसाइट से शिवेन्द्र बहादुर सिंह से संबंधित सामग्री की पड़ताल की तो पता चला कि यहां उनको लेकर न ही कोई जानकारी मौजूद है और न ही उनकी कोई तस्वीर ही वेबसाइट में है।

उनके पहले और बाद के सारे सांसदों का पूरा प्रोफाइल साइट में मौजूद है। राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र के पहले सांसद रहे राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह और उनके बाद सांसद रानी पद्मावती देवी सिंह के पुत्र शिवेन्द्र बहादुर सिंह की राजनीति और पूरा जीवन तिलस्म की तरह है। उन्होंने राजनीति में जितना ऊंचा मुकाम हासिल किया उतना विवादित भी रहे।

अपने चाहने वालों में शिबू के नाम से चर्चित शिवेन्द्र बहादुर सिंह का जन्म 7 जनवरी 1943 को नागपुर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दून स्कूल में हुई। यहां उनके सहपाठी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी रहे। यहां शिवेन्द्र राजीव गांधी के साथ 1955 से लेकर 1962 तक पढ़े। इसके बाद दिल्ली के किरेाड़ीमल कॉलेज में स्नातक तक की उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। बाद में मध्यप्रदेश से कृषि का कोर्स भी उन्होंने किया।

हार से शुरूआत
वर्ष 1977 में शिवेन्द्र बहादुर सिंह को खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से पहली बार टिकट मिली लेकिन वे चुनाव हार गए। बाद में 1980 के लोकसभा चुनाव में उनके बाल सखा राजीव गांधी के कहने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनको टिकट दिया और शिवेन्द्र चुनाव जीत गए। इसके बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह यहां से लगातार दो बार जीतने का रिकार्ड शिवेन्द्र ने बनाया, जो अब तक नहीं टूटा है।

राजनांदगांव जिले की राजनीति में एक वक्त ऐसा भी था कि शिवेन्द्र बहादुर सिंह का एकछत्र राज हुआ करता था। शिवेन्द्र के जानने वाले बताते हैं कि अविभाजित मध्यप्रदेश में राजनांदगांव को छोड़कर सारे फैसले सरकार लेती थी, लेकिन राजनांदगांव के सारे फैसले शिवेन्द्र बहादुर सिंह पर छोड़ दिए जाते थे।

यहां प्रशासनिक कामकाज से लेकर विधानसभा और लोकसभा के टिकट वितरण तक में शिवेन्द्र की चलती थी। इस बात का एक प्रमाण यह भी है कि राजनांदगांव की कांगे्रस की राजनीति में सक्रिय अधिकतर चेहरे शिवेन्द्र के ही तैयार किए हुए हैं।

शिवेन्द्र को 1989 के चुनाव में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके करीब दो साल बाद हुए उपचुनाव में वे फिर चुनाव जीते। इसके बाद के चुनाव में वे हारे और इसके बाद कांग्रेस ने उनको लोकसभा की टिकट से वंचित कर मोतीलाल वोरा को टिकट दे दिया। शिवेन्द्र ने जनता दल से चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद वे राजनीति में हाशिए पर चले गए और 31 दिसम्बर 1999 को उनका निधन हो गया।