
Navratri 2025: सिविल लाइन स्थिति सतरूपा शीतला मंदिर में पूजा अर्चना से न सिर्फ श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, बल्कि यहां असाध्य रोगों से भी मुक्ति का साधन है। मंदिर में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं बताते हैं कि मां शीतला के समीप ही प्राकृतिक दुधिया कुंड है। इस कुंड का पानी कभी नहीं सूखता और इसमें सभी असाध्य रोगों को मिटाने की शक्ति है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष रोमनाथ साहू बताते हैं कि मंदिर परिसर में मां शीतला कब से विराजमान है, इसे लेकर कोई भी पुष्ट जानकारी नहीं है। मंदिर से जुड़े पुराने लोगों का कहना है कि सालों पहले ही चमत्कारिक घटनाओं की वजह से श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़नी शुरू हुई, जो अब निरंतर बढ़ती जा रही है। पूर्व में मंदिर के समीप खुले स्थान पर मां शीतला विराजित थी।
श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और जुड़ाव के साथ परिसर को धीरे-धीरे सुसज्जित किया जा रहा है। आकर्षक मंदिर बनाया गया है और इसका विस्तार निरंतर चल रहा है।
मंदिर को लेकर यह किवदंती प्रचलित है कि पूर्व में स्थानीय बैगा घुटरू ने स्वप्न का हवाला देकर लोगों को मां शीतला के प्रगट होने की जानकारी दी। इसके बाद आस्थावान लोगों ने प्रतिमा को उठाकर चबूतरे में स्थापित कर दिया, लेकिन जैसे ही प्रतिमा उठाई गई, उक्त जगह पर प्राकृतिक कुंड बन गया। ऊंचाई पर होने के बाद भी उक्तकुंड का पानी कभी नहीं सूखता।
कुंड के जल से असाध्य रोगों की चिकित्सा से साथ मंदिर से जुड़े लोग कई चमत्कारिक घटनाओं का भी दावा करते हैं। मंदिर के बैगा और ज्योति कलशों की सालों से देखरेख करने वाले बताते हैं कि कई लोग यहां चमत्कारिक घटनाओं का अहसास कर चुके हैं। इससे मंदिर में लोगों की श्रद्धा लगातार बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही मंदिर में आयोजन भव्य होते जा रहे हैं।
कालांतर में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कर मां शीतला के साथ दक्षिणमुखी काली की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। बताया जाता है कि दक्षिणमुखी काली की प्रतिमा बहुत कम होती है और इसकी पूजा में विशेष महत्व है। इसके अलावा यहां ज्योति कलशों की श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा की भी व्यवस्था होती है। यहां इस बार 1551 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित है।
कालांतर में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कर मां शीतला के साथ काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। बताया जाता है कि काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा बहुत कम होती है और इसकी पूजा में विशेष महत्व है। इसके अलावा यहां ज्योति कलशों की श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा की भी व्यवस्था होती है। यहां इस बार 1551 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित है।
Updated on:
26 Sept 2025 01:54 pm
Published on:
26 Sept 2025 01:53 pm
