
यूपीआई का नया इम्तिहान (PC: AI)
UPI MDR: दुर्ग जिले के बाजारों में डिजिटल भुगतान कारोबार की मुख्य धुरी बन चुका है। व्यापारिक संगठनों के अनुसार भिलाई-दुर्ग में प्रतिदिन होने वाले करीब 50 करोड़ रुपए के कारोबार में लगभग 70 फीसद लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हो रहा है। इसी बीच यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने की राष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चा के बीच स्थानीय व्यापारियों ने भी अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
चेंबर के अनुसार जिन उत्पादों में लाभ का मार्जिन अधिक है, वहां व्यापारी एमडीआर का खर्च स्वयं वहन कर सकते हैं। लेकिन किराना, दवा, डेयरी, हार्डवेयर और रोजमर्रा की जरूरत के सामान जैसे कम मार्जिन वाले कारोबार में यह चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसे मामलों मे बड़े मूल्य के लेनदेन के लिए भुगतान के अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। अंतिम निर्णय सरकार की नीति पर निर्भर करेगा।
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की हालिया बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। बैठक में सहमति बनी कि यदि भविष्य में यूपीआई पर एमडीआर लागू होता है, तो उसका सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। व्यापारी अतिरिक्त लागत को अपने स्तर पर समायोजित करने का प्रयास करेंगे।
व्यापारिक संगठनों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े शोरूम तक यूपीआई भुगतान तेजी से बढ़ा है। अब नकद लेनदेन कुल कारोबार का लगभग 30 फीसद रह गया है, जबकि 70 फीसद भुगतान डिजिटल माध्यमों से हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो करीब 96 फीसद यूपीआई भुगतान पहले की तरह एमडीआर से मुक्त रह सकते हैं, जबकि 2,000 रुपए से अधिक के लगभग चार फीसद भुगतान पर एमडीआर लागू होने की संभावना है।
यूपीआई ने बाजार में नकदी पर निर्भरता कम की है और भुगतान को तेज व आसान बनाया है। यदि भविष्य में कोई नई व्यवस्था लागू होती है तो उसका स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिससे डिजिटल भुगतान की रफ्तार बनी रहे और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न आए। चेंबर इस दिशा में भी प्रयास करेगा और व्यापारी अपने मार्जिन के अनुसार रणनीति बनाएंगे। - अजय भसीन, प्रदेश महासचिव, छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
Updated on:
08 Aug 2026 11:03 am
Published on:
08 Aug 2026 11:03 am
