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सेना की ट्रेनिंग पूरी कर लौटा तो गांव में निकाला जुलूस, मकसद : नई पीढ़ी में देशप्रेम का जज्बा जगाना

जिले के धमधा विकासखंड के पगबंधी गांव के ग्रामीणों ने देशप्रेम का अनूठा मिसाल पेश किया।
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भिलाई

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 25 May 2018, 4:13 PM IST

Bhilai news

सेना की ट्रेनिंग पूरी कर लौटा तो गांव वालों ने निकाला जुलूस, मकसद : नई पीढ़ी में देशप्रेम का जज्बा जगाना

भिलाई. जिले के धमधा विकासखंड के पगबंधी गांव के ग्रामीणों ने देशप्रेम का अनूठा मिसाल पेश किया। सेना की टे्रनिंग पूरी कर घर लौटने पर ग्रामीणों ने न सिर्फ गर्मजोशी से जवान का स्वागत किया बल्कि जुलूस निकालकर पूरे गांव का भ्रमण कराया। गांव में जुलूस निकालने का मकसद ग्रामीणों एवं नई पीढ़ी के प्रति देशप्रेम का जज्बा जगाना था। बैंड बाजे और डीजे की धुन पर नाचते-कूदते गांव के नौजवानों ने हर गली-मोहल्ले में घुमाया। यह नजारा जिसने भी देखा, सभी ने न सिर्फ जवान को सैल्यूट किया बल्कि ग्रामीणों की भावनाओं के कायल भी हुए। जुलूस में क्या बच्चे और जवान, बड़े बुजुर्ग भी शामिल हुए। सरपंच, पंच और वरिष्ठ नागरिकों ने उनका हौसला बढ़ाया गया कि जब भी सीमा पर युद्ध की हालात बनें, तो जाबांज सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मनों का मुंहतोड़ जवाब देना।

किसान के बेटे का सेना में चयन
धमधा विकासखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम पगबंधी के किसान कामता सिन्हा के छोटे बेटे खिलेन्द्र सिन्हा का दुर्ग में हुई सेना भर्ती प्रक्रिया में चयन हुआ। चयन एवं नागपुर के कामठी में ३८ सप्ताह की टे्रनिंग पूरी होने के बाद पहले बार परिवार से मिलने गांव आया। गांव के लोगों ने धमधा से खैरागढ़ रोड स्थित पेंड्रावन में स्वागत किया। सैनिक खिलेन्द्र ने बताया कि दूसरे चरण की टे्रनिंग अहमद नगर महाराष्ट्र में होगी। इसके बाद १२ गॉर्ड पोखरण रेजीमेंट राजस्थान में उनकी ज्वाइनिंग होगी।

दुर्ग साइंस कॉलेज से पढ़ाई
मां ललिता सिन्हा ने बताया कि उनके तीन बेटों में पहले नंबर पर सतीश, दूसरे में अंशुमान और तीसरे नंबर पर और सबसे छोटा खिलेन्द्र सिन्हा है। वह बचपन से ही सेना के बारे में सवाल करता था। गांव में प्राथमिक स्कूल की पढ़ाई पूरी की। आसपास के स्कूल में स्काउट गाइड नहीं होने पर १५ किलोमीटर दूर परपोड़ी स्कूल में एडमिशन लिया। स्काउट और एनसीसी के साथ १२वीं की पढ़ाई पूरी की। स्नातक की पढ़ाई के लिए साइंस कॉलेज दुर्ग में एडमिशन लिया। इस दौरान एनसीसी कैडेट्स के रूप में उन्हें माना, सागर सहित अन्य स्थानों के कैम्प में जाने का मौका मिला। इससे उनका हौसला बढ़ता गया। पहले ही प्रयास में उनका सेना में चयन हो गया।

प्रेरित कर रहे गांव के युवकों को
सतीश सिन्हा ने बताया कि खिलेंद्र पढ़ाई के दौरान गांव के युवकों को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनसे प्रेरित होकर चार युवक गांव छोड़कर दुर्ग चले गए। वहीं रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वे सभी एनडीए और सेना भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।