
राजनांदगांव. स्कूल में बच्चे कक्षा और बरामदे में बैठे हुए हैं और शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाए आपस में झगड़ा करने में लगे हुए हैं। न बच्चों की फिक्र न किसी का डर... एक दो मिनट नहीं, दो घंटे से ज्यादा समय तक सिर्फ झगड़ा! ऐसा सिर्फ सरकारी स्कूल में हो सकता है। जिला मुख्यालय में शहर के बीचो-बीच स्थित स्कूल में दो शिक्षिकाओं के बीच अखाड़े का गवाह वो मासूम बने रहे, जिनकी शिक्षा में गुणवत्ता लाने की जिम्मेदारी इन शिक्षिकाओं की है।
प्यारेलाल स्कूल परिसर में स्थित शासकीय बालक प्राथमिक शाला नंबर 4
शिक्षिकाओं के लड़ाई झगड़े और चिल्म-पो की घटना प्यारेलाल स्कूल परिसर में स्थित शासकीय बालक प्राथमिक शाला नंबर ४ में घटी। दरअसल, पूरे घटना के मूल में प्रधानपाठक का प्रभार है। यहां प्रधानपाठक रहीं मुक्ता दुबे २८ फरवरी को रिटायर हो गई हैं और उनकी मानें तो उन्होंने अपना प्रभार शिक्षिका ललिता सावरकर को दे दिया है। दूसरी ओर उनका आरोप है कि उनसे शिक्षिका प्यारी महोबे पदभार चाहती हैं। हालांकि वे यह भी कहती हैं कि उन्होंने अपनी सेवा में विस्तार के लिए आवेदन दिया है। इसलिए वे स्कूल आ रही हैं।
शासन की अनुमति से 30 अप्रैल तक सेवा पर रखा जा सकता
शिक्षा विभाग में यह नियम है कि बीच सत्र में यदि कोई शिक्षक रिटायर होता है तो वह अपना पूरा प्रभार दूसरे को सौंप सकता है और इसके बाद उसे शासन की अनुमति से सामान्य शिक्षक के रूप में ३० अप्रैल तक सेवा पर रखा जा सकता है। रिटायर्ड प्रधानपाठक दुबे यही विस्तार चाहती हैं और वे चाहती हैं कि आगे भी प्रधानपाठक का पद उनके पास रहे और यही विवाद का मुख्य कारण है। इस संस्था में इनके अलावा शिक्षाकर्मी वर्ग तीन स्वदेश कुमार सागर और अचला शर्मा भी कार्यरत हैं।
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Published on:
07 Mar 2018 12:02 am
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