
भिलाई. भिलाई में एक दौर ऐसा भी था जब थिएटर देखने लोग रातों को जागा करते थे। बीएसपी की स्थापना के साथ ही हमारे शहर में रंगमंच का एक स्वर्णिम दौर भी रहा। हिन्दी, बांग्ला, पंजाबी, मराठी, तेलुगू, तमिल सहित कई अन्य भाषाओं के नाटक मंच खूब परवान चढ़े, पर टीवी कल्चर ने रंगमंच से लोगों का ध्यान ही हटा दिया और मंच पर कलाकारों की संख्या ज्यादा और दर्शकों की संख्या कम होने लगी। अपने इस दौर से भी गुजरकर हमारे शहर में रंगमंच जिंदा है।
30 साल से रंगमंच के जरिए सामाजिक मुद्दों पर कार्य कर रहे विभाष उपाध्याय का पूरा परिवार ही रंगमंच के लिए ही बना है। इप्टा से थिएटर से जुड़कर 18 साल पहले विभाष ने अपनी संस्था सूत्रधार बनाई तो पत्नी अनिता ने भी खूब साथ निभाया। मंच पर बतौर कलाकार तो कभी निर्देशक के रूप में वे साथ रही। बेटी सिगमा ने भी तीन साल की उम्र में बाल कलाकार के रूप में अभियन शुरू किया।
अब सिगमा ने शहर को थिएटर की नई परिभाषा सिखाई। स्टेज के सामने की खाली कुर्सियों को देख सिगमा ने टैरेस थिएटर के जरिए नाटक को लोगों के ड्राइंग रूम तक पहुंचाया। भारत के कई राज्यों में अपनी प्रस्तुति देने के बाद सूत्रधार की टीम श्रीलंका और स्पेन में भी नाटकों की प्रस्तुति दे चुकी है।
विभाष बताते हैं कि सूत्रधार ने बाल नाट्य पर ज्यादा फोकस किया ताकि बचपन से ही बच्चे नाटक और थिएटर के जुड़े रहे और यह उनकी जिंदगी में शामिल हो जाएं। सिगमा बताती है कि उसने थिएटर को ही बतौर कॅरियर ही अपना लिया और अब वह थिएटर पर ही लगातार काम कर रही है।
रंगमंच के मंझे हुए कलाकार एवं शहर के एएसपी शशिमोहन सिंह का ज्यादा वक्त रंगमंच पर ही बीता है। अपनी 24 घंटे की ड्यूटी के दौरान भी वे कुछ वक्त थिएटर के लिए जरूर चुरा लेते हैं। बिहार के सेवासदन नाट्य परिषद से थिएटर से शुरू हुआ उनका रंगमंच का सफर, उनके स्कूल और कॉलेज के मंच से गुजरकर इप्टा रायपुर , सृजन रंगयात्रा राजनांदगांव तक पहुंचा। नामी निर्देशक यश ओबेराय, योग मिश्रा, शरद श्रीवास्तव सहति हबीब तनवीर के नाटक मोर गांव के नाम ससुराल जैसे नाटकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
सृजन रंगयात्रा के बैनर तले तैयार नाटक सिसकियां में उन्होंने एक साथ चार रोल प्ले किए और इसके कई शो हुए। वे बताते हैं कि दिल्ली, मुंबई जैसे शहर में आज भी लोग थिएटर देखने टिकट लेकर जाते हैं पर हमारे शहर में नाटक दर्शकों को तरसते हैं। लोगों को एक बार ही सही पर उन्हें थिएटर जरूर देखना चाहिए क्योंकि इससे जो आनंद मिलता है।
Published on:
27 Mar 2018 12:45 pm
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