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दिगंबर आचार्य विद्यासागर महाराज की स्मृतिया शेष….

दिगंबर आचार्य विद्यासागर महाराज की समता पूर्वक समाधि, जैन समाज में शोकदेश-विदेश में छाई शोक की लहर, जैन समाज स्तंभ, सभी की आंखें हुई नमभीलवाड़ा में आमलियों की बारी व भोपालगंज मंदिर आए थे
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दिगंबर आचार्य विद्यासागर महाराज  की स्मृतिया शेष....

दिगंबर आचार्य विद्यासागर महाराज की स्मृतिया शेष....

दिगम्बर जैन आचार्य विद्यासागर महाराज के देवलोक गमन की सूचना पर देश-विदेश में शोक की लहर छा गई। आचार्य विद्यासागरजी 18 फरवरी शनिवार माघ शुक्ल अष्टमी उत्तम सत्य धर्म के दिन रात्रि में 2:35 बजे ब्रह्म में लीन हो गए। इसकी सूचना मिलने पर जैन समाज में शोक की लहर छा गई। सभी की आंखे नम थी। गुरुदेव ने विधिवत सल्लेखना बुद्धिपूर्वक धारण की थी। जागृतावस्था में उन्होंने आचार्य पद का त्याग करते हुए 3 दिन के उपवास गृहण करते हुए आहार एवं संघ का प्रत्याख्यान कर दिया था।

श्रावक सुरेंद्र गोधा ने बताया कि आचार्यश्री विद्यासागर की मुनि दीक्षा 30 जून 1968 को अजमेर में हुई थी। वर्ष 1968 से वर्ष 1974 तक राजस्थान में 4 जगह अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर व नसीराबाद में चातुर्मास हुए। मुनि विद्यासागर को आचार्य पद 22 नवंबर 1972 में नसीराबाद में मिला था। आखिरी चातुर्मास वर्ष 1974 में अजमेर में कर उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद पहुंचे, जहां वर्ष 1975 का चातुर्मास किया। अजमेर से विहार के बाद आचार्यश्री भीलवाड़ा के भोपालगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। यहां से विहार कर पुर, बागौर, गाडरमाला व चित्तौड़गढ़ होकर फिरोजबाद पहुंचे। वर्ष 1975 का चातुर्मास वहां किया।
भीलवाडा से गई थी विशेष ट्रेन
वर्ष 2013 में महाराष्ट्र के रामटेक व वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश के भोपाल भीलवाड़ा से विशेष ट्रेन से श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे तथा आचार्यश्री को श्रीफल भेंटकर चातुर्मास के लिए विनती की थी।

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