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गुलाल में हो रही मिलावट, सिल्वर कलर से कैंसर का खतरा

होली 28 को, धुलंडी 29 को, होली पर रहें सावधान
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गुलाल में हो रही मिलावट, सिल्वर कलर से कैंसर का खतरा

गुलाल में हो रही मिलावट, सिल्वर कलर से कैंसर का खतरा

भीलवाड़ा।
होली का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। वही रंग अगले दिन धुलंडी को खेला जाएगा। हालांकि भीलवाड़ा शहर में शीतला सप्तमी को खेला जाता है। लेकिन शहर में अन्य राज्यों से आए लोग धुलंडी को भी रंग खेलते है। होली हो और रंग न हों, ये सोचा भी नहीं जा सकता। यदि रंग हर्बल हैं तो खेलने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन बाकी रंग त्वचा के लिए घातक होते हैं क्योंकि इनमेंं लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट जैसे खतरनाक केमिकल होते हैं। इनका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। गहरे रंगों का संबंध ऑक्यूलर टॉक्सिसिटी से होता है। ये आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। आंखों में खुजली, पानी आना, जलन हो सकती है। रंगों में एसिड और केमिकल की वजह से त्वचा संबंधी एलर्जी होती है। शहर में कुछ दुकानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर बिकने वाले रंग हो या गुलाल इनमें मिलावट की जाती है।
गुलाल सामान्य तौर पर अरारोट में रंग मिलाकर तैयार किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत ६० रुपए किलोग्राम हैं। लेकिन इसमें भी मार्बल डस्ट मिलाई जा रही है। ऐसे में इसकी कीमत बहुत कम हो जाती है। मार्बल डस्ट का गुलाल थोक बाजार में २५ रुपए किलो बिक रहा है। इसके इस्तेमाल से त्वचा छिल सकती है। बाजार में अच्छा रंग एक से दो हजार रुपए प्रति किलो से भी महंगा है, लेकिन कई दुकानों पर यह ३०० रुपए किलो में बिक रहा है। इसके पीछे असली कारण ग्लूकोज पाउडर है। ग्लूकोज पाउडर को रंग में मिलाकर रंग की मात्रा को बढ़ा दिया जाता है। रंग में खतरनाक केमिकल मिलाकर उन्हें ज्यादा चटख बनाया जाता है। खासतौर पर नीला, बैंगनी और हरा रंग। ये रंग ढेले के रूप में मिलते हैं। इनसे कैंसर हो सकता है, चर्म रोग, अस्थमा, बालों के झडने जैसी समस्याएं भी होती हैं।
इनका उपयोग है सुरक्षित
लाल रंग के लिए पलाश और टेसू के फूलों का उपयोग करना चाहिए। टेसू का फूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। ये फूल रंग बाजार में भी मिलते हैं।
इन रंगों से हो सकता नुकसान
- हरा रंग कॉपर सल्फेट से बनता है। इससे आंखों में खुजली हो सकती है।
- बैंगनी रंग क्रोमियम आयोडाइड से बनता है। इससे अस्थमा या एलर्जी हो सकती है।
- सिल्वर रंग एल्युमिनियम ब्रोमाइड से बनता है। इससे कैंसर हो सकता है।
- काला रंग लेड ऑक्साइड से बनाया जाता है। इससे किडनी प्रभावित होती है।
- लाल रंग मरक्यूरी सल्फेट से बनता है। इससे स्किन कैंसर, नेत्र रोग हो सकते हैं।

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