
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल परिसर में करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मातृ एवं शिशु अस्पताल में लगी रोगियों की कतार
भीलवाड़ा।
महात्मा गांधी अस्पताल परिसर में करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) में सुविधा शुल्क भारी पड़ रहा है। प्रसूता को सरकारी अस्पताल ले जाते उनके परिजनों से सौदेबाजी शुरू होती है। बच्चा हो या बच्ची। घर में थाली बजानी है तो सुविधा शुल्क देना होगा। कुछ एेसा ही हो रहा प्रसूताओं के साथ। खासतौर से सीजेरियन ऑपरेशन में सुविधा शुल्क भारी पड़ रहा है।
राजस्थान पत्रिका ने रविवार को अस्पताल का दौरा किया तो दबी जुबान से प्रसूताओं के परिजनों ने उद्गार व्यक्त किए। मिठाई के नाम पर भी हर बैड से राशि ली जा रही है। प्रसूताओं को एक से बढ़कर एक सुविधा देने में सरकार कंजूसी नहीं कर रही। नर्सिंगकर्मियों और चिकित्सक को राशि नहीं देने का बोर्ड तक लगा रखा है। उसके बावजूद व्यवस्थाएं बिगड़ी हुई है। उधर, नवनिॢमत अस्पताल में अब भी अव्यवस्थाएं भी तीमारदारों पर भारी पड़ रही है।
डॉक्टर के जाते ही एसी बंद
डॉक्टर के राउंड पर आने से पहले वार्डों में सेंट्रल एसी सिस्टम चालू कर दिया जाता है। जाते ही सिस्टम बंद। हालात यह हो रहे कि प्रसूताओं को गर्मी से बचाने को घर से पंखा लाना पड़ रहा। हर बैड पर घर से लाया पंखा लगा हुआ है।
बैठने के लिए बैंच नहीं
प्रसव के बाद महिला को वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। कई वार्डों में प्रसूता के पलंग के पास बैंच तक नहीं है। एेसे में उनके तीमारदार पलंग पर बैठने को मजबूर हैं। मिलने आने वाले रिश्तेदार और परिचितों को खड़े रहना पड़ता है।
शौचालय तक नहीं पहुंच रहा पानी
शौचालयों में पानी नहीं आने से गंदगी भरी है। प्रशासन से शिकायत के बावजूद निराकरण नहीं हो रहा। उधर, जगह-जगह कचरा पड़ा रहना भी आम बात है। उधर, होमगार्ड परिजनों से बदसलूकी करते है। उनका व्यवहार सही नहीं होता।
इनका कहना है
सुविधा शुल्क लेने का मामला गम्भीर है। कोई भी चिकित्सक और नर्सिंगकर्मी प्रसूताओं से पैसा वसूलता है तो कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल की सफाई पर खास ध्यान है। सफाई के लिए नई भर्ती भी की गई है।
- डॉ. केसी पंवार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, एमजीएच
Published on:
17 Sept 2017 09:04 pm
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