
5 दिन का बेटा उसकी मौसी की गोद में व चार साल की बेटी पिता की गोद में। फोटो पत्रिका
भीलवाड़ा। मातृत्व का सुख एक पल में जीवन भर के दर्द में बदल गया। एमसीएच में प्रसूताओं की मौत के मामले ने कई परिवारों को जिंदगी भर का जख्म दे दिया। इन्हीं में से एक दर्दनाक कहानी 30 वर्षीय ईशा की है, जिसने एक बेटे को जन्म देने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। अब उसका पांच दिन का मासूम मौसी की गोद में अपनी मां की महक तलाश रहा है जबकि चार साल की मासूम बेटी ने रो-रोकर आंखें सुजा ली हैं और अपनी मां के लौटने तक अन्न का दाना खाने से इनकार कर दिया है।
5 जुलाई को मंगलपुरा निवासी ईशा को भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 6 जुलाई को सिजेरियन डिलीवरी के जरिए ईशा ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। 7 जुलाई को हालत गंभीर होने लगी तथा 8 जुलाई शाम 4 बजे ईशा ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं।
ईशा के पति मनीष की शादी 2017 में हुई। मनीष ने कहा कि डॉक्टरों ने पहले ही स्थिति को क्रिटिकल बताया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। 6 से 8 जुलाई के बीच ईशा को सबसे ज्यादा डॉक्टरी देखभाल की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में किसी ने ध्यान नहीं दिया। डॉक्टर बहुत कम समय के लिए आते और बाकी समय स्टाफ उसे देखता था। मेरी पत्नी के शरीर में लगातार बदलाव हो रहे थे, लेकिन वो दिक्कत को ट्रेस ही नहीं कर पाए।
अगर थोड़ा ध्यान दिया जाता, तो मेरी ईशा बच सकती थी। ईशा और उसकी छोटी बहन नेहा की शादी एक ही परिवार के दो भाइयों मनीष और उनके छोटे भाई से हुई थी। अब ईशा का नवजात बच्चा अपनी मौसी नेहा की गोद में है। नेहा बताती हैं कि ईशा उनकी बहन, जेठानी और सबसे अच्छी दोस्त थी। ईशा बेटे के जन्म से बेहद खुश थी और उसने कई तैयारियां कर रखी थीं।
1 अगस्त को ईशा का जन्मदिन था, और उसी दिन उसने अपने नवजात बेटे के नामकरण संस्कार की योजना बनाई थी। ईशा की 4 साल की बेटी भी है। ईशा के पिता रामेश्वर पांडे का कहना है कि ईशा उसकी सलाहकार थी। मां हेमलता पांडे अपनी बेटी की मौत का सीधा आरोप अस्पताल के स्टाफ की संवेदनहीनता पर लगा रही है।
Updated on:
13 Jul 2026 10:13 am
Published on:
13 Jul 2026 10:13 am
