
Bitiya at work in bhilwara
भीलवाड़ा।
पिता की प्यारी बेटियों ने उनके कार्य स्थलों पर जाकर बुधवार को देखा कि उनके पापा कितनी मेहनत करते हैं। वे पिता के काम में कुछ देर के लिए ही सही लेकिन हाथ बंटाकर बहुत खुश थी। उन्हें यह भी अहसास हुआ कि उनके पिता सुबह से शाम तक कितना कठिन परिश्रम करते हैं।
ऑफिस: क्वालिटी कलेक्शन
बिटिया: शाम्भवी मण्डोवरा
पिता का नाम: कृष्णगोपाल मण्डोवरा (मैनेजिंग डायरेक्टर)
पापा के शोरूम पर आ कर कपड़ों की डिजाइन व बूटिक के बारे में जाना। यहां फैशन का खजाना देखकर अच्छा लगा, पत्रिका की ओर से मुझे पापा के काम को करीब से देखने का मौका मिला।
आफिस: शेमरोक स्कूल
बिटिया: रेवा अग्रवाल
पिता का नाम: दौलत अग्रवाल (डायरेक्टर)
बिटिया बोली: पापा किस तरह से स्कूल का संचालन कर डिजिटल थीम पर बच्चों को सीखा देते हैं। ये देखकर मुझे भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। स्कूल प्रबंधन के प्रयास बेहतर हैं।
आफिस: व्हीज किड्स स्कूल
बिटिया- मल्लिका सेठी
मां का नाम: रेणुका जैन (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: मम्मी स्कूल में बहुत मेहनत करती हैं। बच्चों में जो प्रतिभाएं देखी हैं, वह वाकई प्रभावशाली था। मैं भी बच्चों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं। बिटियाओं को अभिभावकों के कार्यालय में लाने का पत्रिका का प्रयास सराहनीय है।
आफिस: सेफरोन
बिटिया का नाम: शिवानी जैन
पिता का नाम: नरेन्द्र जैन (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: पापा का रेस्टारेंट शानदार है। यहां घर की तरह लजीज खाना बनाता है। यह देख कर अच्छा लगा। यहां ग्राहकों ने तारीफ की तो मन खुश हो गया। धन्यवाद पत्रिका
आफिस: प्रेसीडेंसी किड्स पैराडाइज
बिटिया: आश्वी भारद्धाज
दादी का नाम: गीता भारद्धाज (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों को देखा और नन्हें बच्चों को किस तरह से पढ़ाया जाता है, ये दादी से सीखा, भविष्य में इसी क्षेत्र में कार्य करने का मानस है।
आफिस: वद्र्धमान चाय
बिटिया: अनन्या सूरिया
पिता का नाम: मुकुल सूरिया (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया: पापा के कार्य स्थल पर पहुंच कर जाना की चाय की पैकिंग और डिस्पेज कैसे होता है। ये चाय कहां से आती है और किस तरह से घरों तक पहुंचती है। पापा ने यह बताया तो बहुत अच्छा लगा। पत्रिका का धन्यवाद कि सीखने का मौका दिया।
आफिस: विनायक टाइल्स एंड कंस्ट्रक्शन
बिटिया का नाम: धूव्रीता मेवाड़ा
पिता का नाम: प्रशांत मेवाड़ा ( डायरेक्टर)
बिटिया: फैक्ट्री में टाइल्स निर्माण देखा। पापा ने कम्प्यूटर के जरिए किस प्रकार टाइल्स को विभिन्न डिजाइन में किया जाता है, इसके बारे में बताया। राजस्थान पत्रिका की यह मुहिम वाकई सराहनीय है। इससे बिटिया को भी अहसास है कि वो भी किसी से कम नहीं है।
ऑफिस: क्वालिटी कलेक्शन
बिटिया: शाम्भवी मण्डोवरा
पिता का नाम: कृष्णगोपाल मण्डोवरा (मैनेजिंग डायरेक्टर)
पापा के शोरूम पर आ कर कपड़ों की डिजाइन व बूटिक के बारे में जाना। यहां फैशन का खजाना देखकर अच्छा लगा, पत्रिका की ओर से मुझे पापा के काम को करीब से देखने का मौका मिला।
आफिस: शेमरोक स्कूल
बिटिया: रेवा अग्रवाल
पिता का नाम: दौलत अग्रवाल (डायरेक्टर)
बिटिया बोली: पापा किस तरह से स्कूल का संचालन कर डिजिटल थीम पर बच्चों को सीखा देते हैं। ये देखकर मुझे भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। स्कूल प्रबंधन के प्रयास बेहतर हैं।
आफिस: व्हीज किड्स स्कूल
बिटिया- मल्लिका सेठी
मां का नाम: रेणुका जैन (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: मम्मी स्कूल में बहुत मेहनत करती हैं। बच्चों में जो प्रतिभाएं देखी हैं, वह वाकई प्रभावशाली था। मैं भी बच्चों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं। बिटियाओं को अभिभावकों के कार्यालय में लाने का पत्रिका का प्रयास सराहनीय है।
आफिस: सेफरोन
बिटिया का नाम: शिवानी जैन
पिता का नाम: नरेन्द्र जैन (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: पापा का रेस्टारेंट शानदार है। यहां घर की तरह लजीज खाना बनाता है। यह देख कर अच्छा लगा। यहां ग्राहकों ने तारीफ की तो मन खुश हो गया। धन्यवाद पत्रिका
आफिस: प्रेसीडेंसी किड्स पैराडाइज
बिटिया: आश्वी भारद्धाज
दादी का नाम: गीता भारद्धाज (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया बोली: स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों को देखा और नन्हें बच्चों को किस तरह से पढ़ाया जाता है, ये दादी से सीखा, भविष्य में इसी क्षेत्र में कार्य करने का मानस है।
आफिस: वद्र्धमान चाय
बिटिया: अनन्या सूरिया
पिता का नाम: मुकुल सूरिया (मैनेजिंग डायरेक्टर)
बिटिया: पापा के कार्य स्थल पर पहुंच कर जाना की चाय की पैकिंग और डिस्पेज कैसे होता है। ये चाय कहां से आती है और किस तरह से घरों तक पहुंचती है। पापा ने यह बताया तो बहुत अच्छा लगा। पत्रिका का धन्यवाद कि सीखने का मौका दिया।
आफिस: विनायक टाइल्स एंड कंस्ट्रक्शन
बिटिया का नाम: धूव्रीता मेवाड़ा
पिता का नाम: प्रशांत मेवाड़ा ( डायरेक्टर)
बिटिया: फैक्ट्री में टाइल्स निर्माण देखा। पापा ने कम्प्यूटर के जरिए किस प्रकार टाइल्स को विभिन्न डिजाइन में किया जाता है, इसके बारे में बताया। राजस्थान पत्रिका की यह मुहिम वाकई सराहनीय है। इससे बिटिया को भी अहसास है कि वो भी किसी से कम नहीं है।
Published on:
26 Sept 2018 02:32 am
