
Cheating game in the name of studying abroad
जसराज ओझा . भीलवाड़ा।
बच्चों को कम समय और कम बजट में डॉक्टर बनाने के चक्कर में कई अभिभावक उन्हें अधूरी जानकारी के आधार पर विदेश भेज रहे हैं। इसमें कई देशों में तो उनके साथ ठगी का खेल हो रहा है। पूरा पैसा देने के बावजूद कुछ एजेंट और कथित सलाहकार अभिभावकों को गलत जानकारी दे हैं। इससे कई छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। इसी तरह के खेल पर भारत के विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास ने अलर्ट जारी किया है। इसमें अभिभावकों व स्टूडेंट्स को चेताया है कि विदेश में पढ़ाई करने से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी के बारे में पूरी तरह से जानकारी करें।
कई छात्र ऑनलाइन प्रवेश के चक्कर में एजेंट को मुंहमांगे दाम देकर फंस रहे हैं। एेसे में विदेश पहुंचने पर उन्हें वापस भारत भेजा जा रहा है। पिछले छह माह में विदेश में पढ़ाई के नाम पर हो रही ठगी को देखते हुए अब जार्जिया, यूक्रेन व फिलिपिंस में पढ़ाई करने के लिए पहले अलर्ट किया है।
मेडिकल डिग्री के लिए हर वर्ष विदेश जाते दस हजार छात्र
एक आंकड़े के अनुसार, हर साल करीब 9-10 हजार छात्र मेडिकल की डिग्री लेने के लिए विदेश जाते हैं। अभी चीन में 22 हजार रूस में 11 हजार तथा अन्य देशों में करीब १५ हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई की वजह सरलता से एडमिशन मिलना है और भारत में निजी कॉलेजों की तुलना में सस्ता होना है। एमबीबीएस एडमिशन एडवाइजर अतुल बाफना ने बताया कि भारत में सीटें पूरी नहीं है। इस साल नए कॉलेज खुलने के बावजूद भी करीब ११ हजार सीटें कम हो गई। अभी १४ लाख बच्चे परीक्षा में बैठेंगे, उसमें केवल ५० हजार को सीट मिलेगी। साथ ही विदेशों में खर्चा बहुत कम है।
बिना नीट नहीं मिलेगा प्रवेश
कोई भी भारतीय डॉक्टरी की डिग्री कहीं से भी लेता है तो पहले उसे नीट पास करना होगा। यदि कोई विदेशी नागरिक भारत में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता है तो भी उसे नीट पास करना होगा। मंत्रालय ने कहा कि 2018-19 के सत्र से जो भी छात्र विदेशों में मेडिकल पढ़ाई के इच्छुक हों, वे पहले नीट पास कर लें। विदेश जाने के लिए एमसीआई से अहर्ता प्रमाण पत्र लेना होता है। यह प्रमाण पत्र उन्हीं को मिलेगा जो नीट पास कर पाएंगे। यदि कोई बिना नीट पास किए विदेशों से मेडिकल की डिग्री लेते हैं तो वह देश में मान्य नहीं होगी। विदेशों से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट भी देना होता है। वह व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे विदेशों से डॉक्टरी पढ़कर आने वाले छात्रों की गुणवत्ता सुधरेगी।
इन देशों में है ज्यादा जालसाजी
जार्जिया के लिए विदेश मंत्रालय ने चेताया
जार्जिया में कई भारतीय स्टूडेंट एमबीबीएस करने के लिए पहुंच रहे हैं। दूतावास ने 28 मई को यहां से वीजा दिया और वहां छात्रों ने वहां फीस भी दी, लेकिन जब वे जार्जिया पहुंचे तो वहां उन्हें पता चलता है कि किसी संस्थान में उनका एडमिशन हुआ ही नहीं, या एजेंट ने जिस संस्थान के नाम प्रवेश दिलाया है, वह फर्जी है। बाद में वापस भारत आना पडा। अब मंत्रालय ने पत्र जारी किया है कि यात्री व स्टूडेंट्स जार्जिया जाने से पहले संबंधित एजेंसी के बारे में जांच कर लें।
यूक्रेन में सीटें कम, स्टूडेंट्स पहुंचे ज्यादा
भारतीय दूतावास में यूक्रेन के लिए एक अलर्ट जारी किया है। इसमें बताया कि यूक्रेन में कम सीटें थी और भारतीय स्टूडेंट्स ज्यादा पहुंच गए। एजेंटों ने झांसे देकर वहां भेज दिया। अब उनको वहां कोई विकल्प नहीं मिला तो इधर-उधर दूसरे कोर्स में प्रवेश लिया। यही नहीं कुछ यूनिवर्सिटीज सीटों से ज्यादा प्रवेश दे रही है। एेसे में निर्धारित समय में स्टूडेंट्स को फेल किया जाएगा। भारतीय दूतावास ने लिखा है कि जो भी प्रवेश ले वे देखें कि कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन में पंजीकृत है, उन्हींं को भुगतान करें।
फिलिपिंस में दे रहे अधूरी जानकारी
फिलिपिंस में आसानी से मेडिकल में प्रवेश नहीं मिलता है। उन्हें पहले 18 माह का बेसिक साइंस(बीएस ) कोर्स करना पड़ता है। इसके बाद वहां परीक्षा होती है। अब वहां की कुछ यूनिवर्सिटी भारत में ही बीएस कोर्स कराने का दावा कर रही है। जबकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में डॉक्टर की पढ़ाई करने के लिए भी नीट पास करना जरूरी है।
यहां के छात्र एजेंटों के झांसे में आकर वहां मेडिकल में प्रवेश के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहां से उन्हें निराश लौटना पड रहा हैैं। फर्जी प्रवेश दे रहे हैं।
Published on:
30 Jun 2018 12:50 pm
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