
भीलवाड़ा ।
चीन में बढ़ते प्रदूषण के चलते डाई-केमिकल (रंग-रसायन) उद्योगों पर लटके तालों का असर भारतीय टेक्सटाइल उद्योग पर भी पड़ा है। भीलवाड़ा के प्रोसेस हाउसों की तो चाल ही बिगड़ गई है। अब चीन से आयातित डाई-केमिकल के दाम लगभग 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं।
इधर, नोटबंदी व जीएसटी ने पहले ही उद्योगों की हालत खराबकर रखी है। चीन से आयातित डाई-केमिकल्स के बढ़े दामों ने कमाई का सारा गणित गड़बड़ा दिया है। हालात ये हैं कि कई केमिकल तो मिलना ही बन्द हो गए हैं। इसके चलते सबसे ज्यादा प्रभावित प्रोसेस व डेनिम उद्योग हुए हैं। हालांकि भारतीय उद्योगों में तैयार होने वाले डाई-केमिकल के दामों ४ से ५ प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन जीएसटी के कारण फायदा नहीं मिल पा रहा है।
ये हैं मुख्य कारण
नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के कुछ दिन पूर्व से व्यापारियों ने माल बनाना ही बंद किया था। भीलवाड़ा में आठ से साढ़े आठ करोड़ मीटर कपड़ा का उत्पादन प्रतिमाह होता था, जो एक साल से घटकर साढ़े छह से सात करोड़ रह गया है। लेबर चार्ज भी बढ़ गया है।
इसलिए महंगा हुआ चीन का माल
दो माह से चीन में बढ़ते प्रदूषण के चलते कई केमिकल उद्योगों को बन्द कर दिया गया है। वैश्विक ट्रेडवार अमरीका व चीन के बीच चल रहे विवाद के कारण कई अन्तरराष्ट्रीय कम्पनियों ने उत्पादन बन्द कर दिया। इसका कारण अमरीका ने आयातीत माल पर भारी ड्यूटी लगाना माना जा रहा है। कपड़ा उद्योग की स्थिति नोटबंदी के बाद से ही बिगडऩे लगी थी। जीएसटी के बाद तो हो नाजुक हो गई। त्योहारी सीजन होने के बाद भी सुधार नजर नहीं आ रहा। चीन के केमिकल उद्योग बन्द होने से हालत और विकट हो गई है।
सचिन राठी, प्रोसेस उद्यमी
महंगे हो गए केमिकलचीन से आने वाले डाई डेमिकल के भाव 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे प्रोसेस हाउस पर ज्यादा असर पड़ा है। इंडिगो ब्ल्यू कलर तो मिल ही नहीं रहा है।
रवि भूषण, व्यापारी, डाई-केमिकल
Published on:
14 Sept 2018 08:41 pm
