
डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्प्ताल में मरीजों की लम्बी कतार लगी रही।
भीलवाड़ा।
सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल ने दूसरे दिन मंगलवार को चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्प्ताल में मरीजों की लम्बी कतार लगी रही। आउडोर में आए मरीज सबके सब परेशान दिखे। कहने को प्रशासन और चिकित्सा विभाग ने ताना बाना बुनकर वैकल्पिक व्यवस्था की। लेकिन वे सभी खरी नहीं उतरी। आलम यह रहा कि अधिकांश डॉक्टर समय व्यतीत करते देखे गए। बड़े अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर मरीज भगवान भरोसे ही रहे।
सुबह नौ बजे अस्पताल खुल गया। आउटडोर में मेडिकल कॉलेज और आयुष के चिकित्सक पहुंच गए। उसके बाद मरीजों का आना शुरू हुआ। सुबह 10 बजे तक आउटडोर में हर कमरे के बाहर मरीजों की लम्बी कतार देखी गई। इससे कई बार हंगामे तक की स्थिति हो गई। वहीं मातृ एवं शिशु अस्पताल में तो हालात और खराब थे। प्रसूताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खड़ी-खड़ी थकी प्रसूताएं जमीन पर बैठकर बारी का इंतजार करती रही। कमरे के बाहर प्रसूताओं की लम्बी कतार थी।
शुरू नहीं हो पायी लिफ्ट
सोमवार को जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने जिला चिकित्सालय का दौरा कर व्यवस्थाएं देखी थी। इस दौरान उन्होंने वहां लगी लिफ्ट चालू करने के निर्देश दिए थे। कलक्टर के आदेशों के बावजूद लिफ्ट शुरू नहीं हो सकी। प्रसूताओं को मजबूरन परिजन सीढियों से ले जाते दिखाई दिए।
वार्ड में भर्ती मरीजों व परिजनों को हुई परेशानी
डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा परेश्ाानी वार्ड में भर्ती रोगी व उनके परिजन को उठानी पड़ी। वे दोपहर तक डॉक्टर्स के आने का इंतजार करते रहे। अमूमन सभी वार्डों के हालात ऐसे ही रहे। विशेष रूप से प्रसूता वार्ड में महिलाओं को ज्यादा परेशानी हुई।
Published on:
07 Nov 2017 08:43 pm
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