
Fourth time Rajasthan Bar Council win in bhilwara
भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश श्रीमाली लगातार चौथी बार राजस्थान बार कौंसिल में विजयी रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमाली को 1495.08 मत प्राप्त हुए। जो कौंसिल चुनाव में सर्वाधिक हैं। डेढ़ माह से जारी कौंसिल की मतगणना का नतीजा आते ही भीलवाड़ा जिला अभिभाषक संस्था में खुशी की लहर दौड़ गई।
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की। श्रीमाली वर्ष-1998 से लगातार कौंसिल का चुनाव जीतते आ रहे है। यह चौथी मर्तबा है जबकौंसिल में जीत दर्ज कराई। वर्ष-2008 में श्रीमाली राजस्थान बार कौंसिल के अध्यक्ष तथा 2000-01 में उपाध्यक्ष रह चुके है। जिला अभिभाषक संस्था अध्यक्ष राजेन्द्र कचौलिया की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने श्रीमाली का अभिनंदन किया।
समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रकाशचन्द्र पगारिया के अलावा अधिवक्ता मोहनलाल असावा, भगवतीलाल मूंदड़ा, भैरूलाल बापना, सत्यनारायण चतुर्वेदी, अरूण व्यास समेत संस्था के पदाधिकारी मौजूद थे। जीत के बाद पत्रिका से बातचीत में श्रीमाली ने कहा कि उनका ध्येय रहेगा कि वकीलों की वेलफेयर स्कीम में राशि को बढ़ाई जाए। किसी वकील का निधन होने परआश्रितों को पूर्व में 20 हजार रुपए दिए जाते थे।
यह बढ़कर अब ढाई लाख रुपए हो गए। इसे पांच लाख किए जाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा वकील का मेजर ऑपरेशन पर अभी स्कीम में एक लाख रुपए की मदद की जाती है। इसे भी बढ़ाया जाएगा। वहीं अधिवक्ताआें के लिए पेंशन स्कीम, इंश्योरेंस तथा पांच हजार रुपए प्रतिमाह नए वकीलों को स्टाईफंड दिलवाने का बार कौंसिल का जोर रहेगा। मालूम हो, राजस्थान बार कौंसिल में 25 सदस्य मनोनीत होंगे। यह सदस्य अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
शर्मा प्रतापगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश लगाए गए , भार्गव होंगे फैमिली कोर्ट न्यायाधीश
भीलवाड़ा. पारिवारिक फैसलों से चर्चा में रहे फैमिली कोर्ट के जज राजेन्द्र शर्मा का शनिवार को तबादला हो गया। उनको प्रतापगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश लगाया गया। उनके स्थान पर मुकेश भार्गव फैमिली कोर्ट के नए पीठासीन अधिकारी होंगे।
भार्गव इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में उप रजिस्ट्रार (परीक्षा) के पद पर कार्यरत थे। भीलवाड़ा पारिवारिक अदालत के जज रहे राजेन्द्र शर्मा ने तलाक की अर्जी लगाने वाले कई दम्पती को हर सूरत में एक करने के लिए जी जान लगाया। मनमुटाव के कारण एक साथ नहीं रहने वाले दम्पती से शर्मा अलग-अलग बात करके उनकी काउंसलिंग करके माइंड वॉश करते।
इसके बाद बरसों से अलग रहे दम्पती न्यायाधीश शर्मा के प्रयासों से एक होते और उनको माला पहना कर घर भेजा जाता। यहीं नहीं शर्मा ने कई मामलों में दम्पती को एक सप्ताह के लिए साथ बाहर घूमने जाने, एक दिन होटल में साथ लंच करने जैसे प्रस्ताव रखकर गाठजोड़ को टूटने नहीं दिया। वापस लौटने पर दम्पती तलाक की अर्जी को वापस ले
लेते थे।
Published on:
03 Jun 2018 03:27 pm
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