
Government bowed to entrepreneurs, postponed agreement for one year in bhilwara
भीलवाड़ा।
Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) उद्यमियों के सामने केंद्र सरकार भारी दबाब में आ गई है। डेयरी और टेक्सटाइल उद्योग के विरोध के चलते रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) करार को फिलहाल एक साल लंबित रख दिया है। इससे डेयरी और टेक्सटाइल उद्यमियों को बड़ी राहत मिली। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि सरकार ने 2012 से 10 एविएशन और 6 अन्य देशों के साथ ड्यूटी फ्री डेयरी, टेक्सटाइल, फिशरीज और केमिकल सेक्टर में खरीद- बिक्री हो सके, इसके लिए आरसीईपी करार की दिशा में काम शुरू किया था। अभी तक 28 कॉन्फरेंस और 6 समिट हो चुकी हैं। 4 नवंबर को सरकार ने आरसीईपी करार को एक साल के लिए टाल दिया।
Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) उद्यमियों के अनुसार चीन से वाया बांग्लादेश से यार्न और फैब्रिक्स भीलवाड़ा सहित देश के अन्य बाजारों में डम्प कर रहे हैं। आरसीईपी करार के बाद ड्यूटी फ्री होने के बाद चीन का अतिरिक्त उत्पादित यार्न सहित कपड़े का जत्था सीधे देश के अन्य बाजारों में डम्प करने की चिन्ता सता रही थी। इसके चलते भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, पाली, भिवंडी, मालेगांव, इच्छलकरंजी सहित कई संस्थाओं ने केंद्र सरकार को हजारों पत्र लिखे व करार नहीं करने की अपील की थी। भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्यमियों को चिंता थी कि आरसीईपी से चीन का कपड़ा बड़े पैमाने पर आएगा। इससे बड़े नुकसान के साथ ही उद्योग भी बंद होने के कगार पर आ जाएंगे।
इन्होंने लिखे पत्र
भीलवाड़ा के औद्योगिक संगठन मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इण्डस्ट्री तथा सिन्थेटिक्स विविंग मिल्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री, वाणिज्यि मंत्री को कई बार पत्र लिख थे। बांसवाडा़ औद्योगिक संगठन ने भी पत्र लिखे। माना जा रहा है कि देश भर से औद्योगिक संगठनों की ओर से लिखे गए पत्र को ध्यान में रखते हुए ही फिलहाल इस करार को एक साल के लिए टाल दिया गया है।
Published on:
06 Nov 2019 04:04 am
