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सूचना लीक होने से गायब हुए महत्वपूर्ण दस्तावेज, ढाई सौ करोड़ का टैक्स चोरी का खुलासा

- भीलवाड़ा में डीजीजीआई की अब तक की चौथी बड़ी कार्रवाई - स्क्रेप व सरिया बनाने वाले उद्योगों में करोड़ों का हो चुका है घोटाला उजागर - पहले जिंदल टोर, चारभुजा, फकरी स्टील और अब रत्नाकर ग्रुप पर कार्रवाई

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Important documents disappeared due to information leak, tax evasion of Rs 250 crores revealed

Important documents disappeared due to information leak, tax evasion of Rs 250 crores revealed

डायरेक्ट्रेट जनरल जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की जयपुर जोनल यूनिट ने भीलवाड़ा में रत्नाकर ग्रुप में बड़ी कार्रवाई कर टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा किया है। डीजीजीआई ने कुछ ही समय में भीलवाड़ा में चौथी बड़ी कार्रवाई की। इससे करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर होने के साथ 250 करोड़ से अधिक का टैक्स चोरी का मामला भी उजागर हुआ है। सूत्रों के अनुसार इस कार्रवाई की जानकारी दो दिन पहले ही शंकर जाट को हो चुकी थी। इसके चलते कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कार्यालय से गायब कर दिया गया।

रत्नाकर ग्रुप के डायरेक्टर शंकरलाल जाट हैं, उनके भाई डालचंद जाट कंपनी में सहयोगी हैं। डालचंद वर्तमान में कांग्रेस से पार्षद हैं, जो फरार चल हैं। इस ग्रुप में शंकरलाल जाट का पुत्र राजेंद्र चौधरी भी डायरेक्टर है। कंपनी का सालाना टर्न ओवर करोडो़ं रुपए का है। रत्नाकर ग्रुप से पहले हाल ही में ग्रोथ सेंटर स्थित फकरी स्टील के यहां 5.50 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी थी। इससे पहले जिंदल टॉर, चारभुजा स्क्रेप के यहां भी बड़ी टैक्स चोरी पकड़ में आई। हालांकि कुछ साल पहले डीजीजीआई की टीम रत्नाकर ग्रुप के आवास पर कार्रवाई के लिए पहुंची थी, लेकिन टीम को वहा से भगा दिया गया।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है क्योंकि रत्नाकर ग्रुप के मालिक शंकरलाल जाट पूर्व राजस्व मंत्री रामलाल जाट के रिश्तेदार हैं। जांच टीम ने जाट परिवार के कई दस्तावेज खंगाले हैं और बड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

पूछताछ और आगे की कार्रवाई

डीजीजीआई की टीम रत्नाकर ग्रुप के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों को शक है कि फर्जी बिलिंग का नेटवर्क प्रदेश के कई जिलों में फैला हुआ है। जल्द ही अन्य कारोबारी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। रत्नाकर ग्रुप में हुई टैक्स चोरी की राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो गिरफ्तारी भी संभव है। कार्रवाई के बाद भीलवाड़ा के सरिया बाजार में खौफ और चर्चा दोनों का माहौल है। कारोबारी इसे जीएसटी विभाग की सबसे बड़ी कार्रवाई मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में पूरे नेटवर्क की परतें खोली जाएंगी और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह अब केवल कर चोरी का मामला नहीं, बल्कि फर्जी बिलिंग, हवाला और राजनीतिक रिश्तों का ऐसा जाल है जिसने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। जीएसटी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने पहले टैक्स चोरी करने या शिकायत आने पर एंटीविजन शाखा कार्रवाई करती थी, लेकिन इस शाखा को समाप्त करने के साथ सारे अधिकार भी सरकार ने मुख्यालय को दे दिए। इसके चलते टैक्स चोरी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।