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दिल्ली की लैब में कराते हैं पोषाहार की जांच, आधी रिपोर्ट आती ही नहीं

आधे नमूनों की रिपोर्ट समय पर नहीं आती

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बच्चों व महिलाओं को खिलाए जाने वाले पोषाहार की जांच कहने को दिल्ली की एक लैब में होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि आधे नमूनों की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है।

भीलवाड़ा।

बच्चों व महिलाओं को खिलाए जाने वाले पोषाहार की जांच कहने को दिल्ली की एक लैब में होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि आधे नमूनों की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है। इससे पता भी नहीं चल पाता कि जो पोषाहार सप्लाई किया गया है कि वह गुणवत्तायुक्त है या नहीं।

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नियमानुसार हर 15 दिन में सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी)की ओर से पोषाहार बनाने की विधि, उसमें मिलाए गए पोषक तत्व और स्वाद सभी की जांच की जाएगी। गंगापुर में हुई घटना के बाद पत्रिका ने आंगनबाड़ी के पोषाहार का सच जानने की कोशिश की तो सामने आया कि हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन गुणवत्ता पर पूरा ध्यान नहीं रहता है।

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जिले में हैं 2217 आंगनबाड़ी केंद्र

जिले भर सहित शहर के 2 हजार 217 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आवंटित होने वाले पोषाहार की जांच के लिए जिला स्तर पर नहीं, बल्कि दिल्ली की एक प्राइवेट प्रयोगशाला को अधिकृत कर रखा है। पूरे जिले की आंगनबाड़ी केंद्रो को आवंंटित किए जाने वाले पोषाहार के सैंपल की जांच यही लैब करती है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा साल भर से जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों से लिए गए सैंपलों को जांच के लिए दिल्ली की इस प्रयोगशाला में भिजवाया गया, लेकिन एक भी सैंपल पर इस लैब ने गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं किया। हर बार 'ऑल इज वेल' की ही रिपोर्ट आती है।

हर साल करोड़ों रुपए का बजट

पूरे जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत बच्चों को पोषाहार आवंटन के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान हर महीने हो रहा है। इसके अलावा गर्म पोषाहार का बजट मांग के अनुरूप अलग है। यह भी अनुमानित लाखों रूपए हर महीने है। बेबी मिक्स पोषाहार और गर्म पोषाहार पर हर महीने राजकोष से करीब ढाई करोड़ रुपए से भी अधिक का भुगतान होता है। गौरतलब है कि शुक्रवार को बलाईखेड़ा गांव में विषाक्त भोजन से हुई मौतों के मामले में भी पोषाहार के दूषित होने की आशंका जताई जा रही है।

इसलिए है जांच रिपोर्ट पर संदेह
चार साल पहले राज्य सरकार ने रेडिमेड पोषाहार की परपंरा बंद कर स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूह को आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार की सप्लाई का ठेका दे दिया था। एेसे में प्रत्येक केन्द्र पर इन समूह की ओर से पोषाहार की सप्लाई की जाती है। बच्चों की संख्या के अनुरूप वितरित किए जाने वाले पोषाहार के एवज में भुगतान का अधिकार महिला पर्यवेक्षक को दिया गया है, एेसे में वे ही सैंपल जांच के लिए भिजवाए जाते है, जिनकी गुणवत्ता अच्छी किस्म की होती है।

दिल्ली में होती है सैंपल की जांच
दिल्ली की प्राइवेट लैब में प्रत्येक ब्लॉक से जांच के दौरान लिए गए पोषाहार के सैंपल की जांच कराई जाती है। मिलावट या अन्य के बारे में हमें नहीं पता।
सुमेरसिंह श्योराण, उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, भीलवाड़ा।