
जयप्रकाश सिंह/जितेन्द्र सारण
भीलवाड़ा/चित्तौडग़ढ़़। रिश्वतखोरी मामले में पकड़े गए नारकोटिक्स विभाग के अतिरिक्त आयुक्त Sahi Ram Meena के काले कारनामों के पीछे अफीम है। अफीम काश्तकारों व विभाग के बीच की मुख्य कड़ी मुखिया इस काले सोने के 'खेल' के बड़े खिलाड़ी हैं। नारकोटिक्स विभाग के प्रतिनिधि के तौर पर पट्टाधारी किसान से मुखिया ही संवाद करता है। पट्टे कटने से आशंकित किसानों से पैसा वसूल कर मुखिया ही अफसरों तक पहुंचाते हैं। इसमें उसका हिस्सा भी तय होता है।
चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, बारां, झालावाड़ व कोटा जिले में अफीम की खेती होती है। नारकोटिक्स विभाग गत उपज के आधार पर किसानों को पट्टे देता है। एक किसान को 10 आरी (0.1 हैक्टेयर या एक हजार वर्गमीटर) खेती के लिए पट्टा मिलता है। विभाग ने खेत नपाई से दूध तुलाई तक मुखिया के जिम्मे छोड़ रखी है। तय जमीन से आधा आरी ज्यादा बुआई पर किसान को माफी मिल जाती है।
इससे ज्यादा पर पट्टा निरस्त होता है। इसी को लेकर मुखिया किसानों से पैसे वसूलते हैं और हिस्सा अधिकारियों को पहुंचाते हैं। एक आरी भूमि पर 600 ग्राम औसत सूखी अफीम की उपज मानी जाती है। विभाग किसानों से 800-1200 रु. किलो अफीम खरीदता है, जबकि बाजार में कीमत एक से डेढ़ लाख रुपए है। औसत उपज देने के लिए किसान कई बार पानी मिला देते हैं। अतिरिक्त अफीम अवैध रूप से बेच दी जाती है। किसान को पोस्तदाना पूरा मिलता है। दस आरी जमीन पर करीब एक क्विंटल (40 हजार रुपए का) पोस्तदाना निकलता है।
डेढ़ फीसदी प्रोत्साहन राशि
मुखिया को उसके क्षेत्र के किसानों की ओर से जमा करवाई गई अफीम की जितनी राशि बनती है, उसकी कुल राशि का डेढ़ प्रतिशत विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता है। मुखिया होने के नाते विभाग के अधिकारियों से भी उसकी निकटता बनी रहती है, ऐसे में कई मामलों में अधिकारियों को पहुंचाई गई राशि में भी उसका निर्धारित हिस्सा होता है।
तोल भी मुखिया के जिम्मे
डोडे के कच्चे दूध का तोल रोजाना मुखिया को रजिस्टर में दर्ज करना होता है। जब किसान अफीम तुलवाने विभाग के तोल केंद्र पर जाता है, तो रजिस्टर में दर्ज तोल के आधार पर अफीम जमा करवानी होती है। इसमें कई बार गड़बड़ी कर दी जाती है। डोडा चूरे के निस्तारण में भी गड़बड़झाला किया जाता है।
चित्तौडग़ढ़ में सबसे ज्यादा पट्टे
इस साल विभाग ने 31,263 किसानों को पट्टे दिए। करीब 1800 को मुखिया बनाया है। सबसे ज्यादा चित्तौडग़ढ़ में 14,197 को पट्टे मिले हैं। यों तो विभाग ने 50 किसानों पर एक मुखिया नियुक्त किया है। जहां किसान कम हैं वहां गांव के हिसाब से मुखिया बनाया है। गत बार सर्वश्रेष्ठ उत्पादन देने वाले को मुखिया बनाया जाता है। कई बार अफसर अयोग्य लोगों को भी मुखिया बना देते हैं।
Updated on:
31 Jan 2019 08:55 am
Published on:
31 Jan 2019 08:44 am
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