
उदयपुर की तर्ज पर भीलवाड़ा शहर के झील-तालाब भी मुस्कराने चाहिए
कानाराम मुण्डियार
भीलवाड़ा.
टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में सरोवर या झील किनारों पर ऐसा माहौल नहीं हैं, जहां शहरवासी सुबह-शाम ताजी हवा में सुकून की सैर कर सके। शहर में एक झील और दो बड़े तालाब है, लेकिन यहां सैर-सपाटे जैसी रौनक नहीं है। उदयपुर व अजमेर की झीलें संवर सकती है तो हमारे शहर के तालाब-झील भी मुस्कराने चाहिए। भीलवाड़ा शहर की जनता को नए साल में जलाशयों के संरक्षण की सौगात का इंतजार रहेगा। यदि हमारे तालाब व झील संवर गए तो शहर की रौनक भी बढ़ेगी।
हाल ही राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने शहर से दूर गुवारड़ी बांध को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। लेकिन शहरवासियों की मांग है कि गुवारड़ी बांध के साथ शहर की मानसरोवर झील, प्राचीन गांधी सागर व नेहरू तलाई तालाब को भी संवारना चाहिए। इनका विकास भी पर्यटन की दृष्टि से होना चाहिए। लोगों का कहना है कि भीलवाड़ा शहर का विकास विजन (दूरगामी लक्ष्य) के अनुसार करना चाहिए। जलस्रोतों में सीवरेज व केमिकलयुक्त पानी के प्रवेश को रोका जाना चाहिए। झील-तालाब स्वच्छ व साफ रहेंगे और उनका सौन्दर्यीकरण होगा तो शहरवासियों के लिए एक बड़ी सौगात होगी।
झील-तालाबों के हालात : एक नजर
गांधी सागर :
-पिछले सालों में सुधार के नाम पर करोड़ों खर्च किए, लेकिन गंदगी व बदबू को नहीं रोक पाए।
-स्थानीय निकायों ने ही तालाब पेटे की जमीन पर सड़क और दुकानें बना दी।
-तालाब किनारे लगी रेलिंग, पत्थर इत्यादि सामान को लोग उखाड़ कर ले जा चुके हैं, घोर अनदेखी है।
-गंदे नालों का पानी प्रवेश हो रहा। पास की रिहायशी लोगों को बदबू से परेशान होना पड़ रहा है।
नेहरू तलाई (धांधोलाई) :
-अतिक्रमण के कारण तलाई का दायरा घटने के साथ प्राकृतिक सौन्दर्य बिगड़ गया।
-पेटा क्षेत्र की जमीन रियायत दर पर धर्मार्थ सस्थाओं को आवंटित कर दी। रियासतकाल का प्राचीन बड़ा तालाब अब केवल तलाई बनकर रह गया।
-साफ-सफाई नहीं है। तालाब की पाल पर गंदगी भरे वातावरण से बदबू का माहौल है।
-लाखों रुपए खर्च कर मिनी ट्रेन का संचालन शुरू करवाया, लेकिन नियमित नहीं है।
-दीवार व पाल कई जगह से क्षतिग्रस्त है, हर पल हादसे का खतरा बना हुआ है।
मानसरोवर झील :
-झील में शहर का गंदा पानी आ रहा है।
-कृत्रिम झील के आस-पास अशोभनीय गतिविधियां दिखाई दे रही है।
-नियमित रूप से सफाई नहीं होने से झील के पानी से बदबू आ रही है।
-लम्बे समय से नौकायन नियमित नहीं हो रहा।
-झील किनारे चौपाटी के साथ शराब की दुकान खुली है। इससे आम लोग जाने से डरने लगे हैं।
ये प्रयास करेंगे तो संवर जाएंगे जलाशय-
-झील-तालाबों को सीवरेज व केमिकलयुक्त पानी के प्रवेश से निजात मिलनी चाहिए।
-झील व तालाब का संरक्षण व सौन्दर्यीकरण उदयपुर-अजमेर की तर्ज पर होना चाहिए।
-नौकायन का संचालन शुरू कर मनोरंजन बढ़ाया जाना चाहिए।
-फव्वारे चलाकर पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ानी चाहिए, ताकि जलीय जीवों को भी भोजन व ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिले।
-नेहरू तलाई पर ट्रेन का संचालन नियमित हो और टापू का सौन्दर्यकरण किया जाना चाहिए।
-झील-तालाब किनारों या आस-पास अशोभनीय गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएं।
Updated on:
03 Jan 2023 04:59 pm
Published on:
03 Jan 2023 04:59 pm
