
bhilwara
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के सुवाणा गांव में एक विधवा महिला की मौत के बाद भी उसकी बदनसीबी ने उसका साथ नहीं छोड़ा। इसे इसके अंतिम सफर में किसी ने कंधा नहीं दिया। आखिरकार साथ आया तो नारायण जो इसके पति की मौत के बाद लम्बे समय से इसके साथ रह रहा था। यहां दिक्कत ये नहीं थी कि एक महिला किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही थी, बल्कि ये थी कि वो व्यक्ति किसी दूसरी जाति का था। बस इसी का सजा के तौर पर विधवा महिला के बेजान जिस्म तक का समाज और गांव ने बहिष्कार कर दिया।
महिला का शव करीब 12 घंटे तक अंतिम संस्कार के लिए आंगन में इंतजार करता रहा। लेकिन ना तो तथाकथित समाज से कोई आगे आया और ना ही गांव से किसी का कन्धा इसे नसीब हुआ। आखिरकार साथ रहे उसके प्रेमी नारायण ने अकेले ही इसके शव को कंधे पर उठाया और उसका आखिरी सफर पूरा कर इसका अंतिम संस्कार किया।
जानकारी के अनुसार एक महिला के पति की वर्षों पूर्व मौत हो गई। वह गांव में नारायण बलाई के साथ रह रही थी। नारायण बलाई की पत्नी की भी पूर्व में मौत हो गई थी। वह दूसरी जाति के शख्स के साथ रहना परिजनों व समाज को नागवार गुजरा। इन्होंने उसे समाज से बहिष्कृत कर रखा था। परिजन व गांव वाले उससे बातचीत भी नहीं करते थे।
महिला हाल में गंभीर रूप से बीमार हो गई, जिसे इलाज के लिए नारायण जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले गया। वहां महिला ने शनिवार देर रात दम तोड़ दिया। इसकी सूचना महिला के परिजनों तक पहुंचा दी गई। शव घर पहुंचा, न परिवार तैयार, न समाज नारायण तड़के उस महिला का शव लेकर उसके सुवाणा स्थित घर पहुंचा और उसके परिजनों व ग्रामीणों का इंतजार किया। परिजन अंतिम संस्कार को तैयार नहीं हुए। न समाज से कोई अंत्येष्टि कराने आगे आया और न ही गांव के अन्य लोग राजी हुए।
सूचना पर सदर थाना पुलिस पहुंची और घटना की जानकारी ली। मामला संदिग्ध मानते पुलिस पीछे हट गई। वहीं नारायण अंत्येष्टि का इंतजाम करने में जुटा रहा। इस दौरान बारह घण्टे शव बंद मकान में पड़ा रहा। तमाशबीन की भीड़ आखिर दोपहर बाद नारायण एम्बुलेंस लेकर घर पहुंचा। उसने अकेले ही मकान का ताला खोलकर औपचारिकता की।
इस दौरान ग्रामीण घर के बाहर जमा हो गए पर किसी ने शव को हाथ नहीं लगाया। नम आंखों के साथ अकेले नारायण ने शव को अपने कंधे पर उठाया और एम्बुलेंस में रखकर ले गया और अंत्येष्टि कर दी।
बेटा-बेटी भी नहीं आए
ग्रामीणों के अनुसार, उस महिला के एक बेटा व एक बेटी है, जो अपने काका के साथ रहते हैं। बच्चे भी उसी से दूरी बनाए हुए थे। वे मां की मौत की खबर के बावजूद वहां नहीं आए। सदर पुलिस ने परिजनों को बुलाया तो उन्होंने कार्रवाई से इनकार कर दिया।
Updated on:
04 Feb 2018 10:06 pm
Published on:
04 Feb 2018 09:23 pm
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