
हरणी महादेव मंदिर शहर से चार किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ी क्षेत्र में सुरम्य क्षेत्र में है। मंदिर का इतिहास आठ सौ वर्ष से अधिक पुराना है।
भीलवाड़ा।
हरणी महादेव मंदिर शहर से चार किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ी क्षेत्र में सुरम्य क्षेत्र में है। मंदिर का इतिहास आठ सौ वर्ष से अधिक पुराना है। यहां शिव परिवार की मूर्तियां होने का अहसास होने पर क्षेत्र के लोगों ने तलाश की। इस दौरान गुफा में सर्पनुमा चट्टान के नीचे शिव परिवार की प्रतिमा मिली। इसके बाद ये स्थल अटूट आस्था का केन्द्र बन गया। दरक परिवार ने मंदिर के विकास का जिम्मा संभाला। पीढ़ी दर पीढ़ी उनके वंशज इस मंदिर की व्यवस्थाओं को श्रद्धालुओं की मदद से संभाले हैं।
आठ सौ वर्ष पुराने हरणी महादेव मंदिर में गत पांच दशक से महाशिवरात्रि पर्व का मेला श्रद्धालुओं को बांधे हुए है। मेले को भव्य बनाने के लिए पहले आयोजक व्यवसाइयों को पैसे देकर हरणी महादेव बुलाते थे, लेकिन अब मेले की पहचान बन गई है। जमीन पर बैठ कर फेरी लगाने के लिए भी लोगों को किराया चुकाना पड़ रहा है। मेले का दायरा भी अब दो किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया है। यहां दो सौ से अधिक स्टालें लगती है। मेला तीन दिन चलता है।
मेले की व्यवस्था नगर परिषद के जिम्मे
मेले की व्यवस्था का जिम्मा नगर परिषद का है। द्वादश ज्योतिलिंग,रामदेव, हनुमानमंदिर व दाता पावन धाम की भी अपनी पहचान है। पिकनिक के लिए यहां कई धर्मशालाएं है। नए वाहन खरीद कर लाने पर यहां लोग पूजन के लिए पहुंचते है। नव वर वधू भी पूजा अर्चना करने आते है। चामुण्डा माता मंदिर तक रोपवे की योजना भी है।
शिवभक्तों के लिए तीन दिन का मेला 13 से, तैयारियां तेज...
भीलवाड़ा में नगर परिषद हरणी महादेव में 13 से 15 फरवरी तक महाशिवरात्रि मेला लगाएगी। परिषद आयुक्त पदमसिंह नरूका ने मेले का प्रभारी एईएन अखेराम बड़ोदिया को बनाया है । आयुक्त ने मेले में विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी 10 से 15 फरवरी तक हरणी महादेव में लगाई गई है ।
Updated on:
08 Feb 2018 02:11 pm
Published on:
08 Feb 2018 01:56 pm

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