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मानसरोवर झील पर्यटन से दूर

भीलवाड़ा में माउंट आबू की नक्की झील के रूप में बाइस साल पहले विकसित की गई नगर विकास न्यास की कृ त्रिम मानसरोवर झील दुर्दशा का शिकार । पटेलनगर विस्तार में लाखों की लागत से बनी मानसरोवर झील पर पर्यटन तो दूर अब मत्स्य प्रजनन के लिए भी लोग हाथ खिंचे हुए है।

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मानसरोवर झील पर्यटन से दूर

मानसरोवर झील पर्यटन से दूर

भीलवाड़ा में माउंट आबू की नक्की झील के रूप में बाइस साल पहले विकसित की गई नगर विकास न्यास की कृ त्रिम मानसरोवर झील दुर्दशा का शिकार । पटेलनगर विस्तार में लाखों की लागत से बनी मानसरोवर झील पर पर्यटन तो दूर अब मत्स्य प्रजनन के लिए भी लोग हाथ खिंचे हुए है।

न्यास की अनदेखी से मौजूद हाल यह है कि पर्यटकों को आक र्षित करने के लिए बनाया ट्रेक, टूरिज्यम पैलेस, घाट, ट्रेक पर सन्नाटा पसरा है, वही वोटिंग हाउस पर ताले है।
नगर विकास न्यास ने भले ही यहां लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिया, लेकिन शहरी बाशिन्दें यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं के चलते झील से दूर होते जा रहे है।

हालात ये है कि शहर के अंतिम छोर पर पटेलनगर में विकसित की गई ये कृत्रिम झील आवारा तत्वों का जमघट बन कर रह गई है। यहां बने कलात्मक झरोखें, कुर्सियां, नष्ट हो चुके है। घाट टूटे है और गंदगी पसरी है, सफाई के अभाव में झील का पानी सर्डांध मा रहा है। यहां किनारे पर कचरे के ढेर है।

वोटिंग हाउस पर ताले
छह साल पहले झील में निजी एजेंसी के जरिए शुरू की गई पैडल वोटिंग कुछ दिनों बाद ही बंद हो गई। यहां अनुबं धित रेस्टरो को भी सुविधाओं के अभाव में लोगों का इंतजार रहता है। यहां महिला शौचालय पर ताले है, वही दूसरे हिस्से में गंदगी है। कुंड में कॉलोनी का कचरा है। तीन किलोमीटर लम्बे ट्रेक पर रोशनी की प्रर्याप्त सुविधा नहीं है।

116 बीघा में फैला तालाब
जलसंसाधान विभाग का राजस्व रिकार्ड बताता है कि यह मानसरोवर झील नहीं वरन किशनावतो की खेड़ी तालाब है। इसकी भराव क्षमता 520 एमसीएफटी है। इस तालाब से 28 हैक्टेयर यानि 116 बीघा भूमि क्षेत्र में सिंचाई होती थी, इसका अटैचमेंट एरिया 3.24 स्कवायर वर्ग किलोमीटर है। तालाब के पानी का गेज सात फीट तक है। न्यास ने वर्ष 2002 में पटेलनगर विस्तार योजना क्षेत्र के लिए यह क्षेत्र अधिग्रहित किया था।

अब मत्स्य ठेके भी नहीं होते
झील में गंदा पानी आने और प्रदू षित पानी से क्षेत्र में सर्डांध फैली रहने से मत्स्य ठेकेदारों ने मत्स्य पाल से हाथ खिंच रखे है। यही कारण है कि वर्ष 2022 के बाद वर्ष 2023 में भी झील मत्स्य पालन पर ठेके पर नहीं उठ सका। इससे इस साल मत्स्य विभाग को नौ लाख का राजस्व नुकसान हुआ।

पर्यटन की संभावना तलाश रहे है
नगर विकास न्यास सचिव अ भिषेक खन्ना का कहना है कि मानसरोवर झील पर पर्यटन की संभावना तलाश रहे है, को शिश है कि झील उदयपुर के पिछोला झील की भांति विकसित हो। इसके लिए हर संभव को शिश करेंगे।