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भारतीय वाङ्मय विरासत से ही समृद्ध हुआ हिंदी साहित्य का कलेवर

- एमएलवी कॉलेज में 'साहित्य-संवाद' का आयोजन - डॉ. सिंघवी बोले- वेदों से लेकर अपभ्रंश तक की परंपरा ने गढ़ा हिंदी का स्वरूप

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The form of Hindi literature was enriched by the Indian literary heritage.

The form of Hindi literature was enriched by the Indian literary heritage.

माणिक्यलाल वर्मा राजकीय महाविद्यालय के हिंदी विभाग की स्नातकोत्तर साहित्य परिषद का आगाज 'साहित्य-संवाद' के साथ हुआ। मुख्य वक्ता निम्बाहेड़ा कॉलेज के सह आचार्य एवं समालोचक डॉ.राजेंद्र कुमार सिंघवी ने कहा कि हिंदी साहित्य ने अपनी एक हजार वर्ष की यात्रा में भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी के उद्भव और विकास की जड़ें संस्कृत के वेदों, रामायण-महाभारत और अपभ्रंश के महान ग्रंथों में समाहित हैं।

साहित्य की विकास यात्रा: रामायण से संदेशरासक तक

डॉ. सिंघवी ने व्याख्यान के दौरान भारतीय वाङ्मय के विशाल फलक को समेटा। उन्होंने वाल्मीकि की प्रथम कविता के प्रकटीकरण की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे रामायण के आदर्श और महाभारत के कथानक आज भी हिंदी रचनाओं के आधार स्तंभ हैं। व्याख्यान में कालिदास के नाटकों, बौद्ध पिटक ग्रंथों (पालि), जैन आगम (प्राकृत) सहित अपभ्रंश के कवि स्वयंभू के 'पउम-चरिउ', पुष्पदंत के 'महापुराण' और हेमचंद्र के व्याकरण की परंपरा को हिंदी के विकास का मुख्य स्रोत बताया।

दलित चेतना पर शोध प्रस्तुतीकरण

कार्यक्रम में डॉ. सुमन पलासिया के निर्देशन में शोधार्थी डॉ. भगवान साहू ने 'हिंदी में दलित चेतना' विषय पर अपने पीएचडी शोध कार्य का पूर्व-प्रस्तुतीकरण किया।

जड़ों से जुड़ने का आह्वान

प्राचार्य डॉ. संतोष आनंद ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. ममता चांवरिया ने विद्यार्थियों को भारतीय वाड्मय की जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष रंजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा को लोक व्यवहार से जोड़ने पर बल दिया। डॉ. बीएल आर्य ने परिषद की शैक्षणिक भूमिका और विषय प्रवर्तन पर विचार रखे। संचालन छात्रा दुर्गा शर्मा ने किया। परिचय डॉ. सविता टॉक ने दिया। आभार डॉ. नेमीचंद कुमावत ने जताया। इस दौरान डॉ. अनंत दाधीच, डॉ. अश्विनी जोशी, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. नारायण लाल माली, डॉ. राजश्री सेठी सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।