
मेनाल का झरना गा रहा गीत
भीलवाड़ा जिले की सीमा से सटे एवं चित्तौड़गढ़ के बेगूं में मौजूद मेनाल का अनूठा इतिहास है। यहां पुरा सम्पदा बिखरी हुई है। यहां देवालय वास्तुकला एवं शिल्पकला से गढ़े हुए है। यहां की प्राकृतिक छंटा अद्भूत है। यहां लाड़पुरा वन क्षेत्र में पैंथर समेत कई हिंसक जीवों की मौजूदगी रहती है। समीप ही बूंदी व कोटा जिला होने से भी यहां वर्ष पर्यन्त पर्यटकों की भीड़ रहती है। मान्यता है कि यहां के गिरते झरने से मधुर स्वरलहरी भी उठती है। इससे यह अहसास होती है कि मेनाल का झरना गीत गा रहा है।
भीलवाडा जिले के बिजौलिया, उपरमाल क्षेत्र में शनिवार को झमाझम बारिश हुई। उपरमाल क्षेत्र से शुरू हुई मेनाली नदी में पानी की आवक हुई। इससे जिले में मेनाल का जल प्रपात शुरू हो गया है। यह करीब 180 फीट ऊंचाई से गिरता है। मेनाली नदी सिर्फ 25 किमी बहती है। यह नदी सामरिया होकर गोवटा बांध को भरने के बाद त्रिवेणी संगम में मिलती है। जल प्रपात शुरू होने के साथ ही यहां चार महीने तक पर्यटकों का आना जाना शुरू हो जाता है।
मेनाल के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक शिव मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी ईस्वी में राजा सोमेश्वर छम्हाना और उनकी पत्नी, रानी सुहावदेवी द्वारा करबाया गया था। कहा जाता है ग्रीष्मकाल के दौरान राजस्थान की प्रचंड गर्मी से बचने के लिए, अक्सर पृथ्वीराज चौहान द्वारा इस शिव मंदिर का दौरा किया जाता था।
मेनाल शिव मंदिर का निर्माण पत्थर से हुआ है जिसमें जटिल नक्काशीदार खंभे और एक शिवालय है, जिसमे शिव जी की मूर्ति स्थापित हैं। सभी शिव मंदिरों की तरह, इस मंदिर में भी प्रवेश द्वार पर नंदी की एक मूर्ति है। यहां मंदिर में खुजराहो मंदिर जैसी कुछ चित्रकारी भी की गई है।
वैसे तो मेनाल शिव मंदिर 24 घंटे खुला रहता है लेकिन सुबह 9.00 बजे से शाम 7.00 बजे तक यहां घूमने एवं दर्शन के लिए उपयुक्त समय है। मेनाल शिव मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्रवेश और घूमने के लिए निःशुल्क है।
Published on:
25 Jun 2023 04:57 pm
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