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भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग के विकास में रोड़े बने कानून, तीन हजार करोड़ के निवेश पर लगा ब्रेक

ब्रेक से लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ के निवेश रूकने के साथ ही तीन हजार लोगों को भी रोजागर से वंचित रहना पड़ रहा है।

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भीलवाड़ा में डेनिम का करीब डेढ़ करोड़ मीटर कपड़े का प्रति माह उत्पादन हो रहा है। इसके विस्तार के लिए कई उद्यमियों ने आवेदन कर रखा है। लेकिन पानी की स्वीकृति नहीं मिलने से इसका विस्तार नहीं हो रहा है।

भीलवाड़ा।

वस्त्रनगरी ने जिस गति से विकास किया है उसी गति से पिछले दो साल से विकास पर ब्रेक सा लग गया है। इसके पीछे मुख्य कारण केन्द्र व राज्य सरकार के कानून को रोड़ा माना जा रहा है। किसी भी उद्योग में पानी के टयूबवेल खोदने पर केन्द्र सरकार ने भूजल बोर्ड से स्वीकृति लेना अनिवार्य कर रखा है तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कई ऐसे आदेश है जो विकास को रोक दिया है। इस ब्रेक से लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ के निवेश रूकने के साथ ही तीन हजार लोगों को भी रोजागर से वंचित रहना पड़ रहा है।

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वस्त्रनगरी वर्ष 2000 से लगातार विकास कर रही है। इस दौरान हर साल 500 से 600 करोड़ का नया निवेश आ रहा था। लेकिन दो साल से विकास पूरी तरह से ठप हो गया है। इसके पीछे मुख्य कारण एनजीटी के निर्देश पर सभी उद्योगों को टयूबवेल संचालन के लिए केन्द्रीय भूजल विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए ऑन लाइन आवेदन भरना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है। आवेदन के साथ क्षेत्र की सेसमिक (भूजल) रिपोर्ट की अनिवार्यता भी लागू है। इसके लिए उद्यमियों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। उद्यमियों की बात माने तो 90 प्रतिशत उद्योगों में लगे टयूबवेल का उपयोग पीने के पानी या सफाई के लिए किया जाता है। इस आदेश से लद्यु एवं मध्यम उद्योगों को परेशानी हो रही है।

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डेनिम उद्योग में सबसे बड़ा रोड़ा पानी की स्वीकृति
भीलवाड़ा में डेनिम का करीब डेढ़ करोड़ मीटर कपड़े का प्रति माह उत्पादन हो रहा है। इसके विस्तार के लिए कई उद्यमियों ने आवेदन कर रखा है। लेकिन पानी की स्वीकृति नहीं मिलने से इसका विस्तार नहीं हो रहा है। जबकि डेनिम में प्रचूर संभावना है। विङ्क्षवग व डाईग लाइन लगाने के लिए कुछ लीटर पानी का उपयोग होता है। टयूबवेल के लिए केन्द्रीय भूजल की अनुमति आवश्यक है जो नहीं मिल रही है। जबकि भीलवाड़ा के उद्यमियों ने प्रदूषण को रोकने के लिए अत्याधुनिक ईटीपी, आरओ तथा एमईई प्लांट लगा रखे है।

स्वीकृति मिले तो पांच उद्यमी लाइन में
कपड़ा व्यापारियों की माने तो पानी व डेनिम उत्पान की स्वीकृति मिलती है तो पांच से छह उद्यमी डेनिम प्लांट लगाने को तैयार है। इन उद्योगों से लगभग एक करोड़ मीटर डेनिम का और उत्पादन हो सकता है। स्वीकृति मिलने पर इन उद्योगों में लगभग 650 से अधिक एयरजेट लूम आ सकती है। जिस पर लगभग ३२ सौ करोड़ का निवेश होगा। इसके अलावा डेनिम की दस लाइन पर 300 करोड़ का और निवेश होगा। इन उद्योगों में तीन हजार से अधिक लोगों को रोजागर मिल सकता हैष लेकिन सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है।

डेढ़ करोड़ मीटर प्रति माह का उत्पादन
देश में अहमदाबाद के बाद भीलवाड़ा ही एक मात्र ऐसा टेक्सटाइल क्षेत्र है जहां डेढ़ करोड़ मीटर प्रतिमाह डेनिम का उत्पादन होने के साथ जॉब पर भी डेनिम का उत्पादन हो रहा है। मुख्य रूप से कंचन, आरएसडब्ल्यूएम, संगम, सुपर गोल्ड, मनोमय तथा कलर साईजर्स शामिल है। इनके अलावा अन्य उद्योगों में जॉब पर डेनिम का कपड़ा बन रहा है। एक लाइन पर लगभग एक माह में करीब ९ लाख मीटर कपड़े का उत्पादन होता है।

देश का पहला डेनिम हब बन सकता भीलवाड़ा
राज्य सरकार पानी की स्वीकृति के लिए कोई योजना बनाए या केन्द्र सरकार से प्रयास करे तो आने वाले समय में एक हजार करोड़ का नया निवेश आ सकता है। इससे भीलवाड़ा देश में पहला डेनिम हब बन सकता है। इसके लिए मेवाड़ चेम्बर सहित अन्य औद्योगिक संगठनों ने प्रदेश की सरकार के साथ ही केन्द्रीय कपड़ा मंत्री को भी पत्र लिखे गए है।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स


सरकार को कराया था अवगत
सरकार के तीन माह पहले माण्डलगढ़ दौरे के दौरान डेनिम उद्योग में आ रही अड़चनों को लेकर ज्ञापन दिया था। सरकार को बताया कि डेनिम की स्वीकृति मिलती है तो भीलवाड़ा में साढ़े तीन हजार करोड़ का नया निवेश तथा तीन हजार लोगों को रोजागर मिल सकता है। लेकिन इस पर अभी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि देश व विदेश में डेनिम की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अतुल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन