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आबादी भूमि को बताया कृषि आराजी, 68 लाख रुपए की होगी वसूली

रजिस्ट्री कराने के दो वर्ष पुराने मामले में उप पंजीयन कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है

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पच्चीस वर्ष पहले बेची गई दलित परिवार की जमीन को दोबारा फर्जी तरीके से बेचने और आबादी भूमि होने के बावजूद कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराने के दो वर्ष पुराने मामले में उप पंजीयन कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है

भीलवाड़ा।

पच्चीस वर्ष पहले बेची गई दलित परिवार की जमीन को दोबारा फर्जी तरीके से बेचने और आबादी भूमि होने के बावजूद कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराने के दो वर्ष पुराने मामले में उप पंजीयन कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। समूचे मामले में रजिस्ट्री कराने वाले भूखंड धारकों के नाम 68 लाख रुपए की वसूली राशि का नोटिस जारी किया गया है। ये राशि जमा नहीं कराने की स्थिति में पंजीयन विभाग इस रजिस्ट्री के निरस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। ये कार्रवाई राजस्थान पत्रिका में समाचार अभियान 'जमीन पर दबंगों का खेल के तहत प्रकाशित समाचारों के बाद की गई।

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यूं खेला गया खेल
कृष्णानगर में एक दलित मां-बेटे ने 25 वर्ष पहले अपने हिस्से की खातेदारी की जमीन लोगों को स्टाम्प पर बेच दी। उस पर करीब 50 से अधिक परिवार मकान बनाकर रहने लगे। इस बीच मां की मौत के बाद उसकी बेटी इसमें हिस्सेदार बन गई और चित्तौडग़ढ से आए दबंगों के माध्यम से बिकी हुई जमीन की फिर से रजिस्ट्री करवा दी। बाद में दबंगों ने पहले से रह रहे परिवारों से भूखंड और मकान खाली करने के लिए परेशान करना शुरू कर दिया।

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राह में नहीं आए कोई रोडा

पंजीयन कार्यालय में राजस्व ग्राम मलाण की आराजी 504 व 505 संख्या में जो जमीन २५ वर्ष पूर्व बिकी थी, उनमें से कुछ भूखंड चित्तौडग़ढ़ के ही भील समाज के पांच व्यक्तियों के नाम प्रभावशालियों ने 21 नवम्बर 2016 व 10 जून 2017 को रजिस्ट्री करवा दी। इस जमीन को पूरी तरह से कृषि भूमि बताया गया, जबकि ये क्षेत्र आबादी में होने के साथ ही यहां मकान भी बने हुए थे।

राजस्थान पत्रिका के समाचार अभियान के खुलासे के बाद उप पंजीयक ने मौका देखा और गिरदवार से रिपोर्ट तलब की। इस रिपोर्ट में गिरदावर ने मौके पर कृषि भूमि के बजाए आबादी क्षेत्र होने और रजिस्ट्रीशुदा जमीन के कई हिस्से होने और यहां मकान बने होने की रिपोर्ट की।

नोटिस भिजवाए, होगी वसूली

शिकायत के आधार पर कृष्णानगर में रजिस्ट्री की गई जमीन की सर्वे रिपोर्ट गिरदावर से तलब की। सर्वे में यहां भूमि आबादी क्षेत्र में होने के साथ ही भवनों का निर्माण होने और व्यवसायिक गतिविधियां भी होना पाया गया। 21 नवम्बर 2016 व 10 जून 2017 को हुई चार अलग-अलग रजिस्ट्री को लेकर नए सिरे से पंजीयन राशि तय की गई। इस आधार पर प्रत्येक एक रजिस्ट्री पर 17 लाख रुपए की बाकियात निकलती है। ये कुल राशि 68 लाख रुपए की हुई है। उक्त राशि की वसूली को लेकर रजिस्ट्रीकर्ताओं को नोटिस जारी कर दिया गया है। ये राशि नहीं चुकाई गई तो रजिस्ट्री निरस्त कर दी जाएगी।
नीता बसीटा, उप पंजीयक भीलवाड़ा


प्रावधानों की आड में घपला


पच्चीस लाख या इससे अधिक के सौदे पर मौका देखे जाने का प्रावधान है, इसी प्रावधान की आड लेते हुए कृष्णानगर की जमीन को रजिस्ट्रीकर्ताओं ने कृषि भूमि बताते हुए कीमत प्रत्येक जमीन की दो-दो लाख रुपए ही बताई। इसी आधार पर उन्होंने भीलवाड़ा में रजिस्ट्री करवा ली। दूसरी तरफ जिनके नाम पूर्व में रजिस्ट्री हुई, उनकी आर्थिक हालत पहले से ठीक नहीं है, एेसे में उप पंजीयन कार्यालय की तरफ से 68 लाख की वसूली को लेकर जारी हुए नोटिस उनके भी होश फख्ता है।