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Rajasthan: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होमवर्क आसान, लेकिन सोचने की ताकत हो रही कमजोर, सीखने की ललक खत्म

एआई की बढ़ती लत बच्चों और युवाओं की रचनात्मकता पर असर डाल रही है। सोचने-समझने की प्रक्रिया कम हो रही है, जिससे सीखने की ललक खत्म हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह टीमवर्क, संवाद और निर्णय क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है।

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AI Makes Homework

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (फोटो- पत्रिका)

भीलवाड़ा: कभी होमवर्क से लेकर विज्ञान मॉडल तक बच्चे अपने दिमाग की गठरी खोलते थे, तो दफ्तरों में रिपोर्ट और प्रेजेंटेशन बनाने के लिए लोग अपनी रचनात्मकता खंगालते थे। लेकिन अब बस एक कमांड दीजिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आपको ‘तुरंत जवाब’ दे देता है।


सहूलियत की यह आदत अब लत में बदल रही है। सोचने और सवालों से जूझने की प्रक्रिया खत्म हो रही है और सबसे बड़ी बात, सीखने की ललक भी खत्म हो रही है। एआई अब बच्चों की क्षमताओं पर असर डाल रही है। युवा वर्ग में यह एक ‘डिजिटल शॉर्टकट जनरेशन’ को जन्म दे रही है।


एआई लत बन गई


गृहिणी ललिता बताती हैं कि उनका बेटा होमवर्क के दौरान एआई की मदद लेने लगा। धीरे-धीरे यह उसकी लत बन गई। परीक्षा के समय जब उसे उत्तर लिखने पड़े तो वह नहीं लिख पाया। विमल को स्कूल में एक मॉडल बनाने का प्रोजेक्ट मिला। उसने एआई की मदद से तुरंत मॉडल तैयार कर दिया, लेकिन जब परीक्षा में मॉडल बनाने का मौका आया, तो वह असफल रहा।


एआई में सीमाएं हैं


-यह केवल पहले से फीड किए गए डेटा और एल्गोरिथम के आधार पर काम करता है। ऐसे में यदि डेटा गलत हुआ तो परिणाम भी भ्रामक या खतरनाक हो सकते हैं।
-एआई का अत्यधिक उपयोग न केवल हमारी निर्णय क्षमता को कमजोर करता है, बल्कि हमें मानसिक रूप से भी सुस्त बना सकता है।
-पहले जहां किसी समस्या का हल सोच-विचार से निकाला जाता था, अब लोग सीधे एक बटन दबाकर समाधान खोजने लगे हैं। यह सोचने की आदत को खत्म कर रहा है।


एआई पर निर्भरता के नुकसान


-रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता में गिरावट
-पारंपरिक नौकरियों पर असर, बेरोजगारी की आशंका
-निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ना


विशेषज्ञ की राय


एआई से काम जरूर तेज हुआ है, लेकिन इससे रचनात्मकता घट रही है। लोग सोचने की जगह एआई पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे टीमवर्क और संवाद कौशल पर भी असर पड़ा है।
-अनुराग जागेटिया, सहायक प्रोफेसर, एमएलवीटी इंजीनियरिंग कॉलेज, भीलवाड़ा