
RCEP now threatens textile industry in bhilwara
भीलवाड़ा।
Threat to textile industry आर्थिक संकट से जुझ रहे राजस्थान विशेष कर भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग पर अब केन्द्र सरकार की ओर से १५ एशिया देशों के साथ करने जा रहे रीजनल कांप्रिहेंसिव इकॉनोमिक पार्टनरशिप यानी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के प्रस्तावित समझौते से संकट खड़ा हो गया है। इसका देश के टेक्सटाइल उद्योग पर भारी असर पड़ेगा। टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े औद्योगिक संगठनों ने इस प्रस्तावित समझौते को करने से पहले पुन: विचार करने पर जोर दिया है।
Threat to textile industry औद्योगिक संगठनों का कहना है कि केन्द्र सरकार विशेष रूप से कपड़ा, गारमेन्ट, यार्न, स्टील सहित अन्य उत्पाद को लेकर भारत और चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 15 अन्य देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता प्रस्तावित है। इससे एक से दूसरे देश में टेक्सटाइल उत्पाद का आयात में विशेष छूट व सुविधा दी जाएगी।
पहले से ही संकट
टेक्सटाइल मिल्स पहले से संकट के दौर से गुजर रही है। चीन व बांग्लादेश से मांग की कमी आने से निर्यात में भीलवाड़ा व राजस्थान पिछड़ रहा है। भीलवाड़ा से चीन को निर्यात लगभग शून्य पहुंच गया। चीन से आयात सस्ता पॉलिस्टर कपड़ा और पॉलिस्टर विस्कॉस यार्न, वियतनाम व इंडोनेशिया से आयात स्टेपल यार्न के कारण टेक्सटाइल उद्योग पहले से संकट में है। बांग्लादेश और वियतनाम से सस्ते आयात के लिए प्रतिस्पद्र्धा में बढ़त नहीं ले पा रहे है। आयात ड्यूटी के बाद भी भारत में चीन से आयातित माल सस्ता है। इसका मुकाबला स्थानीय कारोबारी नहींं कर पा रहे हैं।
इन पर असर
मुक्त व्यापार समझौते का मैनमेड फायबर उत्पादक टेक्सटाइल उत्पाद केन्द्र भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, पाली, बालोतरा, जोधपुर, भिवाड़ी, सूरत आदि पर बुरा असर पड़ेगा। गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग में ३० लाख तथा राजस्थान में लगभग २० लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे पॉलिस्टर निर्माता, कपास उत्पादक, पॉलिस्टर कपड़ा निर्माता प्रभावित होंगे।
ड्राफ्ट सार्वजनिक करें सरकार
चीन से आने वाले उत्पाद पर ड्यूटी के बावजूद सस्ता माल आ रहा है। इससे स्थानीय टेक्सटाइल प्रतिस्पद्र्धा नहीं कर पा रहे हैं। आरसीईपी के तहत मुक्त व्यापार समझौता का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए। ड्राफ्ट स्तर पर ही देश की प्रमुख औद्योगिक संगठनों से चर्चा की जाए। उसके बाद ही कोई निर्णय सरकार को करना चाहिए।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स
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टेक्सटाइल उद्योग भारी संकट में
अमरीका-चीन में मंदी का असर पहले से कपड़ा उद्योग पर पड़ा है। वियतनाम, इंडोनेशिया देशों से सस्ता धागा आने से स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो रहा है। अब सरकार १५ देशों से मुक्त व्यापार समझौता कर रही है। प्रस्तावित समझौते में क्या है, यह खुलासा नहीं हुआ है। टेक्सटाइल उद्योग के हालात ठीक नहीं है। केंद्र को इस पर मंथन करना चाहिए।
एसएन मोदानी, चेयरमैन, राजस्थान टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन, जयपुर
Published on:
21 Oct 2019 06:02 am
