
Relief to the textile industry due to reduction in GST on yarn and readymade garments
केंद्र सरकार ने कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत देते हुए धागे पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है। यह नई दरें सोमवार से लागू हो गई हैं। इस निर्णय से न केवल कपड़ा उत्पादन लागत में 2 से 3 प्रतिशत की कमी आएगी, बल्कि कार्यशील पूंजी की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इससे त्योहारों के सीजन में रेडिमेड गारमेंट की बिक्री में जबरदस्त उछाल की संभावना है। जीएसटी दर में की गई यह कटौती उद्योग जगत, व्यापारियों और उपभोक्ताओं सभी के लिए फायदेमंद साबित होगी।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का हल
कपड़ा उद्योग लंबे समय से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या से जूझ रहा था। पहले धागे जैसे कच्चे माल पर जीएसटी दर तैयार कपड़ों से अधिक थी। इस कारण निर्माताओं का इनपुट टैक्स क्रेडिट फंस जाता था और कार्यशील पूंजी अवरुद्ध हो जाती थी। अब दर घटने से यह बाधा दूर होगी और नकदी प्रवाह सुधरेगा।
फंसी हुई पूंजी से मिलेगी मुक्ति
लद्यु उद्योग भारती के प्रदेश सदस्य महेश हुरकुट ने बताया कि जीएसटी दर कम होने से निर्माताओं को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे नकदी प्रवाह में सुधार होगा। कार्यशील पूंजी उपलब्ध होगी। धागा सस्ता होने से उत्पादन लागत में 2-3 प्रतिशत की कमी आएगी। इसका सीधा फायदा रेडिमेड गारमेंट सेक्टर को मिलेगा।
रेडिमेड गारमेंट हुए 7 फीसदी सस्ते
सरकार ने रेडिमेड गारमेंट पर जीएसटी दर भी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है। इससे रेडिमेड कपड़े 7 प्रतिशत सस्ते हो गए। आम उपभोक्ता को सीधा लाभ मिलेगा। नवरात्र से दीपावली तक खरीदारी बढ़ेगी। छोटे व्यापारियों से लेकर ग्रामीण बाजार तक को फायदा मिलेगा। पहले दिन बाजार में कपडा खरीदने वालों की शोरूम पर चहल -पहल बनी रही थी।
त्योहारों में बढ़ेगी रौनक
कपड़ा व्यापारी दिनेश जैन का कहना है कि जीएसटी दर घटने से त्योहारों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी। सस्ते कपड़े बिक्री में तेजी लाएंगे और व्यापारी वर्ग को बड़ा लाभ होगा।
Published on:
23 Sept 2025 08:34 am
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