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हाईव किनारे चल रहा जर्जर स्कूल, मौत के साये में पढ़ रही बेटियां, गुजरते वाहन पैदा कर रहे कंपन

आटूण पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय हजारी खेड़ा की बेटियां डेढ़ माह से खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं

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आटूण पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय हजारी खेड़ा की बेटियां डेढ़ माह से खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

भीलवाड़ा।

आटूण पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय हजारी खेड़ा की बेटियां डेढ़ माह से खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। मांडल-मंडपिया नेशनल हाईवे किनारे स्थित जिस सरकारी स्कूल में ये पढ़ रही है, वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। भवन हाईवे से इतना पास है कि ट्रकों की आवाजाही से कंपन महसूस होता है। इससे कभी भी गिर सकता है। यहां 6 जनवरी को 4 बजे अचानक टायर फटने से एक ट्रोला अनियंत्रित होकर टकरा गया, जिससे कमरे की दीवारों में दरारें आ गई। छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि स्कूल तब बंद था।

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संस्था प्रधान राजेशकुमार शर्मा द्वारा पीईईओ आटूण के जरिए जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.) को मामले से अवगत कराया। इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी हरकत में नहीं आए। नन्ही जानों के सिर पर हर पल मंडराते खतरे को देख संस्था प्रधान ने सभी बालिकाओं को स्कूल में खाना पकाने वाली महिला (कुक-कम हेल्पर) के घर ले जाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन कुछ अभिभावकों ने कुक के यहां से स्कूल चलाने पर एेतराज किया। इसके चलते उनकी बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया, तो दोबारा उसी क्षतिग्रस्त स्कूल भवन के बाहर पेड़ की छांव में कक्षाएं संचालित करना शुरू कर दी। संस्था प्रधान शर्मा का कहना है कि स्कूल भवन अधिकांश क्षतिग्रस्त हो चुका है। कमरों की छत व दीवारें किसी भी वक्त गिर सकती है। इधर, जगदीश कुमावत, चांदमल भील, मेवाराम कुमावत व चुन्नीलाल सहित कई अभिभावकों का कहना है, बेटियों को स्कूल भेजने से डर लगता है पर बेटियां अपनी पढ़ाई की जिद को लेकर मानती ही नहीं।

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स्कूल प्रबंधन और ग्रामीण अब दुविधा में

अब यह स्कूल भवन एनएच-79 के फोरलेन से सिक्सलेन हो रहे के दायरे में आ गया। एनएचएआई ने स्कूल प्रबंधन को बिना नोटिस दिए ही सिक्सलेन बनाने का काम शुरू कर दिया था। सिक्सलेन विद्यालय की दीवार से सटकर निकल रहा है। वहीं ग्रामीणों ने एनएचएआई से विद्यालय भवन को अन्यत्र शिफ्ट करने मांग की। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों ने दो इंजीनियरों को मौके पर भेजा। दोनों ने विद्यालय भवन को 2001 में ही एनएचएआई के अवाप्त बताकर भवन निर्माण कराने से मना कर दिया। सरपंच चंद्रकला शर्मा ने बताया कि स्कूल के नाम पर मात्र आठ सौ वर्ग फिट जमीन का पट्टा बना हुआ है। इधर, एनएचएआई ने स्कूल हटाने को कह दिया। स्कूल प्रबंधन व ग्रामीण अब दुविधा में फंस गए हैं।

कुक-कम हेल्पर के घर बन रहा पोषाहार

स्कूल में सितंबर व अक्टूबर में चोरी हो गई। पोषाहर व खाना पकाने की सामग्री चली गई। पुलिस ने रिपोर्ट लिखने में आनाकानी की। स्टाफ ने आपस में रुपए एकत्र कर गैस कनेक्शन व खाना पकाने का सामान खरीदा। अब चार माह से ही कुक-कम हेल्पर धापूदेवी अपने घर से ही खाना पकाने के बाद स्कूल में लाकर बच्चों को परोस रही है।

पैसे मिलते ही निर्माण

एनएचएआई ने मुआवजे से मना कर दिया है। सरकार व विभाग को बजट के लिए पत्र लिखा। बजट मिलते ही पंचायत की जमीन पर स्कूल भवन का निर्माण शुरू करवाएंगे। चंद्रकला शर्मा, सरपंच आटूण

पंचायत के सहयोग से स्कूल के लिए नई जगह तलाश कर कलक्टर से मिलेंगे। तब तक छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए गांव में ही किराए का भवन लेकर स्कूल संचालित करेंगे।

राधेश्याम शर्मा, डीईओ प्रारंभिक (द्वितीय)

भीलवाड़ा टीसी कटवा कलक्ट्री के बाहर देंगे धरना

जर्जर भवन की हालत देखकर बेटियों की चिंता हरदम सताती रहती है। शिक्षा विभाग ने अगर इस ओर अब ध्यान नहीं दिया तो बेटियों की टीसी कटवाकर कलक्ट्री के बाहर धरने पर बैठेंगे।

हरलाल कुमावत, अध्यक्ष, स्कूल शाला प्रबंधन समिति

शायद बड़े हादसे की बाट जोह रहा प्रशासन

ग्रामीणों ने 13 नवंबर को ही पीईईओ के माध्यम से शिक्षा विभाग को सूचित किया था। उसके बावजूद विभाग व प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। शायद बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहे है।

मोहनलाल कुमावत, अभिभावक