
सहाड़ा व रायपुर में क्वाट्र्ज ग्राइडिंग यूनिट में काम करने वाले श्रमिक पत्थरों से पाउडर बना रहे हैं।
भीलवाड़ा.
जिले में मांडलगढ़-बिजौलियां को खनन क्षेत्र माना जाता रहा है, यहां अभी तक सेंड स्टोन में काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों की मौत फेफडे़ खराब होने एवं श्वास की बीमारी से जा चुकी थी, लेकिन हाल ही के सर्वे में सहाड़ा नया सिलिकोसिस प्रभावित क्षेत्र के रूप में सामने आया है। यहां सहाड़ा व रायपुर में क्वाट्र्ज ग्राइडिंग यूनिट में काम करने वाले श्रमिक पत्थरों से पाउडर बना रहे हैं।
ये पाउडर भी श्रमिकों के फेफडों को लील रहा है और श्रमिकों की जाने जा रही है। खान विभाग ने बीमारी की रोकथाम के कई उपाय कर विशेष बजट दिए जाने की घोषणा कर रखी है, लेकिन ये सब कागजी साबित हो रहे है, मौजूदा हालात ये है कि श्रमिकों को जीवन रक्षक उपकरण भी कार्य स्थल पर नहीं मिल पा रहे है। क्षेत्र में क्वार्ट्ज ग्राइडिंग यूनिट से इसका खतरा और बढ़ गया है।
शुक्रवार को ही बागोर क्षेत्र में भी सिलिकोसिस का एक संदिग्ध रोगी मिला है। सिलिकोसिस से सहाड़ा के ही सलीम खान पठान की मौत हो चुकी है। उनके उपचार के दौरान सरकार की ओर से एक लाख रुपए की मदद तो मिली लेकिन बाद की सहायता अब तक नहीं मिली है। परिजनों ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। अब वे आवेदन करेंगे। वहीं अब कई संदिग्ध रोगी सामने आए है।
नए क्षेत्र, जहां हो रही बीमारी
सहाड़ा के गंगापुर में रीको एरिया, सहाड़ा, लाखोला, गठिला फार्म, साकरिया, महेंद्रगढ़ रोड, धुंवाला मांडल, रायसिंहपुरा, तुलछा का खेड़ा व आसींद क्षेत्र, कोशीथल के आगे जिलोला आदि जगह ४०० ग्राइडिंग यूनिट चल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्वार्ट्ज का दाना बनाने की यूनिट सिलिका के कण रिलीज करती है। इससे यह बीमारी होती है। पत्थर का पाउडर बना गुजरात के मोरवी मंे भेजते हंै। वहां टाइल्स बनती है।
1308 रोगी मिले, सबसे ज्यादा मांडलगढ़ में
प्रदेश में भीलवाड़ा जिला सिलिकोसिस का गढ़ है। यहां अब तक १३०८ रोगी मिल चुके हैं। इनमें सर्वाधिक मांडलगढ़ व बिजौलियां क्षेत्र की खदानों में काम करने वाले ही है। इनमें करीब सौ की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रशासन के पास इनके परिजन नहीं पहुंचे हैं। सरकार इन मरीजों को उपचार के लिए एक लाख रुपए तथा मरने के बाद तीन लाख रुपए की आर्थिक सहायता देती है। जानकारी के अभाव में इन मरीजों को टीबी का रोगी मानकर ही उपचार किया जा रहा है।
अब बदले हालत
विभाग की ओर से हर तीन माह में जांच होती है। संदिग्ध रोगी कितने मिले इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन पांच साल पहले जो स्थितियां थी वे अब बदल गई है। यूनिट्स में नई मशीनें आ गई। अंदर सीसी सड़कें बना दी। पूरी तरह से कवर कर दिया गया इसलिए मिट्टी कम उड़ती है। फिर भी खतरा रहता है इसलिए श्रमिकों को मास्क देते हैं। थोड़ी जागरुकता की कमी से वे लोग इसका उपयोग कम करते हैं। फिर भी हम समय-समय पर समझाते रहते हैं।
शेषकरण शर्मा, अध्यक्ष गंगापुर खनिज उद्योग संघ
श्रमिकों की जांच के निर्देश
जो भी ग्राइडिंग यूनिट्स है उन्हें समय-समय पर श्रमिकों की जांच कराने के लिए निर्देशित किया है। क्वार्ट्ज का दाना बनाने में निकलने वाले पाउडर से खतरा रहता है। विभाग पूरी तरह चौकस है। और इसकी जांच करेंगे।
कमलेश्वर बारेगामा, खनि अभियंता
Published on:
26 Apr 2018 11:51 am
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