
आचार्य पदारोहन पर विशेष अनावरण समारोह होगा पोस्ट ऑफिस में
भीलवाड़ा।
दिगम्बर जैन आचार्य विद्यासागर महाराज के 50 में आचार्य पदारोहन के अवसर पर भारतीय डाक विभाग की ओर से भारतवर्ष से करीब 200 जगह व राजस्थान में 40 जगह से आचार्य के विशेष आवरण निकाले जा रहे हैं। पवन अजमेरा ने बताया कि इसी कड़ी में भीलवाड़ा जिले से तीन स्थानों से विशेष आवरण निकाले जाएंगे। भीलवाड़ा में चतुर्मुखी पारसनाथ कल्पद्रुम बड़े मंदिर, चवलेश्वर पाश्र्वनाथ व बिजोलियां पाश्र्वनाथ पर डाक विभाग द्वारा विशेष आवरण जारी किया जाएगा। सोमवार को तीनों स्थानों पर डाक विभाग के अधिकारियों एवं समाज के नागरिकों की उपस्थिति में विमोचन कार्यक्रम होगा।
अजमेरा ने बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को ग्राम सदलगा, तहसील चिक्कोड़ी जिला बेलगाम (कर्नाटक) में हुआ था। 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर शहर में आचार्य ज्ञानसागर महाराज से दिगम्बर दीक्षा धारण की। 4 वर्ष की कठिन साधना, कठोर तपस्या और ज्ञान आराधना करके गुरुदेव की परीक्षा में पास हुए। तब आचार्य गुरुवर ज्ञानसागर महाराज ने उन्हें 22 नवंबर 1972 को नसीराबाद में अपना आचार्य पद देकर आचार्य बनाया। 50 साल की इस यात्रा में आचार्य विद्यासागर महाराज ने देश की लगभग 50 हजार किलोमीटर की पदयात्रा में श्रमण संस्कृति की धर्म पताका को फहराते हुए जैनदर्शन को समाज के सामने उपस्थित किया है। इस दौरान देश की युवा पीढ़ी जो उच्च कोटि की डिग्रियां हासिल कर उनके चरण सन्निधि में आए और उनसे प्रभावित होकर उन जैसे बनने उनके चरणों में समर्पित हो गए। आचार्य ने उन्हें मुनि दीक्षा प्रदान की तथा युवतियों को आर्यिका दीक्षा देकर साध्वी बनाया। लगभग 500 ब्रह्मचारी ब्रह्मचारणियों को साधना के सोपानों पर आरूढ़ किया। आचार्य विद्यासागर महाराज ने अनेक हिंदी ग्रंथों की रचना की हैं। जिसमें मूकमाटी महाकाव्य देश विदेश की एक अनुपम महान कृति के रूप में प्रसिद्धि पा रहा है। आचार्य ने गोवंश की दुर्दशा देख करुणा पूर्वक समाज को प्रेरणा दी। इसके तहत देश मे 75 गौशालाएं खोली गई। इनमें एक लाख से अधिक गोवंश संरक्षण प्राप्त कर रहा है। आचार्य की प्रेरणा से जबलपुर, डोंगरगढ़, रामटेक, इंदौर, ललितपुर पांच स्थानों पर प्रतिभास्थली नाम से बालिका शिक्षा के आधुनिक गुरुकुलों की स्थापना हुई। सागर में आधुनिक चिकित्सा एलोपैथी के रूप में भाग्योदय तीर्थ के नाम से चिकित्सालय की स्थापना हुई हैं। जबलपुर में आयुर्वेदिक महाविद्यालय व चिकित्सालय की स्थापना की जा चुकी है। आचार्य की प्रेरणा से देशभर में कलात्मक पाषाण निर्मित अनेकों तीर्थो व जिनालयों की स्थापना की गई है। ऐसे आचार्य के 22 नवंबर 2021 को 50 वें आचार्य पदारोहण के अवसर पर पूरे देश भर में संस्कृति शासनाचार्य स्वर्ण महोत्सव के रूप में भारतवर्ष की समाज मनाने जा रही है। इस उपलक्ष पर देशभर में जैन समाज ने पोस्ट ऑफिस से आचार्य की स्मृति व संस्कृति शासनाचार्य महोत्सव की स्मृति में स्पेशल कवर, कैंसिलेशन सील जारी करा रही है जो वर्षभर जारी होते रहेंगे। यह महोत्सव 22 नवंबर 2021 से 22 नवंबर 2022 तक देश की समाज मनाएगी।
Published on:
21 Nov 2021 06:50 pm
