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भीलवाड़ा के कपड़ा कारोबारियों को मध्यप्रदेश से मिला न्योता

अधिकारी आए और कहा-धार में बन रहा टेक्सटाइल पार्क, जिसका उठाएं फायदा
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भीलवाड़ा के कपड़ा कारोबारियों को मध्यप्रदेश से मिला न्योता

भीलवाड़ा के कपड़ा कारोबारियों को मध्यप्रदेश से मिला न्योता

भीलवाड़ा. भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री प्रदेश में महंगी बिजली व पानी की कमी से जूझ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश सरकार के अधिकारी भीलवाड़ा आए व टेक्सटाइल उद्यमियों को अपने यहां उद्योग लगाने की पेशकश की। इससे पहले गुजरात व बिहार से भी अधिकारी भीलवाड़ा के उद्यमियों को लुभाने यहां आ चुके हैं।


मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्यमियों को सभी तरह की सुविधा देने को बात कही। असल में ये केंद्र सरकार की पीएम मित्रा के तहत मिले टेक्सटाइल पार्क के लिए धार में उद्योग लगाने का न्योता देने आए थे।

अभी मप्र का टेक्सटाइल उद्योग सालाना 15,600 करोड़ रुपए का निर्यात करता है जबकि राजस्थान में अकेले भीलवाडा़ जिले से निर्यात 9 हजार करोड़ रुपए का है। मप्र के अधिकारियों ने राजस्थान से अच्छी सुविधा अपने राज्य में दिलाने का आश्वासन दिया।

मेवाड़ चैंबर में संपर्क बैठक में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के सलाहकार एनके शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग को औद्योगिक विकास के लिए थ्रस्ट सेक्टर ही नहीं, प्रमुख सेक्टर माना गया है। शर्मा ने बताया कि मंदसौर जिले में चार जगह 150 से 200 हैक्टेयर के औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। टेक्सटाइल पार्क रतलाम से 50 किमी दूर धार के भैंसोला में 1563 एकड़ पर विकसित किया जा रहा है। यहां स्पिनिंग उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध होगी। इससे 15-20 किमी के दायरे में तिलगारा एवं छाया में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इस दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के चीफ जनरल मैनेजर अनिल अरोड़ा, पीसिंह, आनन्द टेम्बाहरे, शशांक ने विभिन्न जानकारी दी। चैम्बर महासचिव आरके जैन, डॉ. पीएम बेसवाल, सचिन राठी, सुमित जागेटिया, वीके मानसिंगका, अतुल शर्मा आदि उपस्थित थे।
ये सुविधाएं बताई

शर्मा ने बताया कि रेडीमेड गारमेन्ट एवं अपेरेल सेक्टर का तेजी से विकास हो रहा है। बच्चों के रेडीमेड गारमेंट निर्माण में मध्यप्रदेश प्रथम है। इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में नए रेडीमेड कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेन्ट के लिए प्रशिक्षित श्रमिक उपलब्ध है। राज्य में इस क्षेत्र में 60 से 80 प्रतिशत महिला श्रमिक कार्यरत है। औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य सरकार निगम को 40 प्रतिशत भाग देती है। यह हम उद्योगों के हित में लागत में कम की जाती है।

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