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अरावली के ‘अस्तित्व’ पर संकट: भीलवाड़ा जिले में 500 हेक्टेयर में फैली खदानों ने पहाड़ों को किया खोखला

- खौफनाक: 23 गांवों तक फैली 100 मीटर ऊंची पहाड़ियां अब मैदान में तब्दील, लाखों टन माल निकाला - नियमों को ताक पर रख अरावली का सीना छलनी - भविष्य की पीढ़ियों के हिस्से का पहाड़ आज काटा जा रहा

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The mines, spread across 500 hectares in Bhilwara district, have hollowed out the mountains.

The mines, spread across 500 hectares in Bhilwara district, have hollowed out the mountains.

राजस्थान की जीवन रेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला भीलवाड़ा जिले में अपना वजूद खोती जा रही है। जिले के 23 गांवों में फैली अरावली की 100 मीटर ऊंची पहाड़ियां अब भू-माफियाओं और खनन के जाल में फंसकर मैदान बनती जा रही हैं। लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इन खदानों ने न केवल पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचाई है, बल्कि अरावली को भीतर से पूरी तरह खोखला कर दिया है।

इन क्षेत्रों में 'रक्तबीज' की तरह फैला खनन

जिले की चार प्रमुख तहसीलों में खनन का जाल इस कदर फैला है कि अरावली का स्वरूप पहचानना मुश्किल हो गया है। जहाजपुर क्षेत्र के धांधोला, पचानपुरा, घाटारानी, घेरूटा, आमल्दा, चैनपुरा, चंवलेश्वर और अभयपुरा। कोटड़ी व बनेड़ा क्षेत्र के ककरोलिया घाटी, इटावा, कंकोलिया, लापिया, मानपुरा, रणिकपुरा, जालिया और सुल्तानगढ़। मांडल व बदनोर क्षेत्र में कारोई के गुरला, मोडा मगरा, जगधारी, उम्मेदपुरा, भरक, सुरगटीस करथा, बटेरी और शीतला का चौड़ा तथा भीलवाड़ा तहसील क्षेत्र में सेथूरिया क्षेत्र में भी पहाड़ियों पर धड़ल्ले से मशीनें चल रही हैं।

जिले में 87 खदान हैं अरावली में

भीलवाड़ा जिले में खनिज विभाग ने अब तक 87 खनन पट्टे व क्वारी लाइसेंस जारी कर रखे हैं। इनमें 58 क्वारी लाइसेंस बदनोर के शीतला का चौड़ा व बिकरिया में फिलाइट शिस्ट (पट्टी कातले) की खदाने हैं। यह खदानें रियासत काल से चली आ रही हैें। स्थिति यह है दोनो दिशाओं में खनन के गहरे गड्ढे हैं उसके बीच मुख्य सड़क है। यहां वाहन चालक थोड़ी सी लापरवाही से परिवार की जीवनलीला तक समाप्त हो सकती है। हालांकि यह सभी खदानें पिछले कुछ समय से बंद पड़ी हैं। इसी प्रकार खनिज में 19 लीजे जिले भर में आंवटित कर रखी हैं। इमसे भी दो खदानें समय समाप्त होने के कारण बंद पड़ी है।

खनिज की 'लूट' में पहाड़ों की बलि

पहाड़ियों को खोदकर निकाले जा रहे बेशकीमती खनिजों की सूची लंबी है। इन खदानों से डोलोमाइट, सोप स्टोन, मेसेनरी स्टोन, माइका (अभ्रक), फेल्सपार, क्वाट्र्ज, मार्बल, चाइनाक्ले और फिलाइट शिस्ट जैसे मिनरल्स निकाले जा रहे हैं। औद्योगिक मांग को पूरा करने के चक्कर में लाखों टन माल निकालकर पहाड़ों को जमींदोज किया जा चुका है।

नियमों की उड़ रही धज्जियां

सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण या खनन गतिविधि पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखकर होनी चाहिए, लेकिन भीलवाड़ा में स्थिति इसके उलट है।

  • मैदान बनती पहाड़ियां: 100 मीटर की ऊंचाई वाली पहाड़ियां अब समतल नजर आने लगी हैं।
  • पर्यावरण असंतुलन: वन्यजीवों का आवास नष्ट हो रहा है और भूजल स्तर पर भी इसका विपरित प्रभाव पड़ रहा है।
  • धूल और प्रदूषण: खनन के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है।