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केंद्र का बड़ा दांवः मशीन होंगी हाईटेक, टेक्सटाइल सेक्टर की बदलेगी सूरत

केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम का शंखनाद किया है। यह योजना न केवल पुरानी पड़ चुकी मशीनों को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भारी संख्या में नए रोजगार पैदा कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को ताना-बाना बुनेगी। अब धागे से लेकर डिजाइन तक सब स्मार्ट यह […]

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The Centre's big bet is to make machines hi-tech, transforming the textile sector.

The Centre's big bet is to make machines hi-tech, transforming the textile sector.

  • टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम

केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम का शंखनाद किया है। यह योजना न केवल पुरानी पड़ चुकी मशीनों को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भारी संख्या में नए रोजगार पैदा कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को ताना-बाना बुनेगी।

अब धागे से लेकर डिजाइन तक सब स्मार्ट

यह नई पहल पांच भाग वाले एकीकृत कार्यक्रम का हिस्सा है। इसमें नेशनल फाइबर स्कीम, हैंडलूम व हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स्ट-इको पहल और कौशल विकास के लिए समर्थ 2.0 को शामिल किया गया है।

राजस्थान व भीलवाड़ा को मिलेगा फायदा

राजस्थान के भीलवाड़ा, पाली और बालोतरा जैसे पारंपरिक क्लस्टर्स में संचालित एमएसएमई को इस स्कीम से फायदा मिलेगा। कॉमन टेस्टिंग सेंटर्स बनने से यहाँ का कपड़ा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरेगा। इससे निर्यात की राह और आसान होगी।

टेक्सटाइल की सूरत बदलेगी

  • तकनीकी का तड़का: पारंपरिक क्लस्टर्स को नई मशीनरी और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • क्वालिटी का पहरा: हर क्लस्टर में कॉमन टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सेंटर खुलेंगे। गुणवत्ता जांच के लिए दूर नहीं जाना होगा।
  • रोजगार की गारंटी: टेक्सटाइल सेक्टर श्रम-प्रधान है, इसलिए इस निवेश का सीधा असर नए रोजगार सृजन पर पड़ेगा।
  • समर्थ 2.0 से स्किल: इंडस्ट्री व कॉलेजों के साथ मिलकर युवाओं को नई तकनीक सिखाई जाएगी, ताकि वे फैक्ट्रियों में सीधे काम कर सकें।
  • खादी को सम्मान: महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के माध्यम से खादी और हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाएगा।
  • फाइबर स्कीम: नेशनल फाइबर स्कीम के माध्यम से प्राकृतिक और नए जमाने के मेनमेड फाइबर में देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी और लागत में कमी आएगी।

हाई-टेक मशीनरी सब्सिडी

नई योजना के तहत शटल-लेस लूम्स और हाई-स्पीड स्पिनिंग मशीनों को प्राथमिकता दी गई है जो कम समय में अधिक धागा या कपड़ा बना सकें। क्लस्टर्स में पुरानी मशीनों को बदलकर नई मशीनों के लिए 20 से 25 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। डिजाइनिंग केड एवं केम और इन्वेंट्री मैनेजमेंट में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन पर सब्सिडी मिलेगी। ऐसी मशीनें जिससे पानी की खपत 40 प्रतिशत कम करती हैं या सौर ऊर्जा से चलती हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 5 प्रतिशत ग्रीन इंसेंटिव मिलेगा।

कल होगी दिल्ली में बैठक

इस स्कीम को लेकर टेक्सटाइल सचिव की अध्यक्षता में 19 फरवरी को सुबह 10 बजे वाणिज्य भवन दिल्ली में बैठक होगी। इसमें देश भर के टेक्सटाइल उद्मयी व औद्योगिक संगठन हिस्सा लेंगे। इसमें राजस्थान से मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री भीलवाड़ा का प्रतिनिधिमण्डल हिस्सा लेगा।

टेक्सटाइल के लिए फायदेमंद होगी योजना

यह स्कीम एमएसएमई के लिए फायदेमंद होगी। टेस्टिंग सेंटर और मशीनरी सपोर्ट से टेक्सटाइल उद्योग को ओर अधिक मजबूती मिलेगी। इस योजना का उद्देश्य केवल मशीनें खरीदना ही नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को स्मार्ट और ग्लोबल बनाना है।

आर के जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री