
The Centre's big bet is to make machines hi-tech, transforming the textile sector.
केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम का शंखनाद किया है। यह योजना न केवल पुरानी पड़ चुकी मशीनों को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भारी संख्या में नए रोजगार पैदा कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को ताना-बाना बुनेगी।
यह नई पहल पांच भाग वाले एकीकृत कार्यक्रम का हिस्सा है। इसमें नेशनल फाइबर स्कीम, हैंडलूम व हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स्ट-इको पहल और कौशल विकास के लिए समर्थ 2.0 को शामिल किया गया है।
राजस्थान के भीलवाड़ा, पाली और बालोतरा जैसे पारंपरिक क्लस्टर्स में संचालित एमएसएमई को इस स्कीम से फायदा मिलेगा। कॉमन टेस्टिंग सेंटर्स बनने से यहाँ का कपड़ा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरेगा। इससे निर्यात की राह और आसान होगी।
नई योजना के तहत शटल-लेस लूम्स और हाई-स्पीड स्पिनिंग मशीनों को प्राथमिकता दी गई है जो कम समय में अधिक धागा या कपड़ा बना सकें। क्लस्टर्स में पुरानी मशीनों को बदलकर नई मशीनों के लिए 20 से 25 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। डिजाइनिंग केड एवं केम और इन्वेंट्री मैनेजमेंट में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन पर सब्सिडी मिलेगी। ऐसी मशीनें जिससे पानी की खपत 40 प्रतिशत कम करती हैं या सौर ऊर्जा से चलती हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 5 प्रतिशत ग्रीन इंसेंटिव मिलेगा।
इस स्कीम को लेकर टेक्सटाइल सचिव की अध्यक्षता में 19 फरवरी को सुबह 10 बजे वाणिज्य भवन दिल्ली में बैठक होगी। इसमें देश भर के टेक्सटाइल उद्मयी व औद्योगिक संगठन हिस्सा लेंगे। इसमें राजस्थान से मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री भीलवाड़ा का प्रतिनिधिमण्डल हिस्सा लेगा।
यह स्कीम एमएसएमई के लिए फायदेमंद होगी। टेस्टिंग सेंटर और मशीनरी सपोर्ट से टेक्सटाइल उद्योग को ओर अधिक मजबूती मिलेगी। इस योजना का उद्देश्य केवल मशीनें खरीदना ही नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को स्मार्ट और ग्लोबल बनाना है।
आर के जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री
Published on:
18 Feb 2026 09:25 am
