
The sample takes the corona suspect's throttle and nasal swab in bhilwara
भीलवाड़ा । कोरोना वायरस से संक्रमित हर रोगी की लैब टेक्नीशियन थ्रोट और नेजल स्वाब का सेम्पल ले रहे है। जो सबसे बड़ा खतरा उनके सामने है। इन सेम्पल को टेस्ट ट्यूब में डालने तथा उसे पैकिंग करके आईस बॉक्स में पैक करके जांच के लिए जयपुर भेजा जा रहा है।
इस आइस बॉक्स का तापमान भी 4 से 8 डिग्री तक रखा जाता है। इन सैंम्पल को सरकारी कर्मचारी वाहन के माध्यम से जयपुर ले जाता है। लेकिन सरकार अब प्रयास कर रही है कि मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस के संदिग्धों की स्क्रीनिंग दो मिनट में जाए।
इसके लिए थ्रोट और नेजल स्वाब नहीं लिया जाएगा। रैपिड किट के माध्यम से खून की जांच होगी। इस जांच को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) से अनुमोदन भी मिल गया है। हालांकि यह रैपिड किट आयात करने होंगे।
सूत्रों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमितों के इलाज का नोडल सेंटर महात्मा गांधी चिकित्सालय है। जहां अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। अभी तक यहां आने वाले संदिग्धों के नमूने लेने के लिए अलग से सेन्टर बना रखे है। वह सैम्पल जयपुर भेजने पड़ते हैं। वहां से रिपोर्ट आने में 24 से 48 घंटे लग जाते हैं। कई बार तो संदिग्ध के नमूने रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। ऐसे में लैब टेक्नीशियन को फिर से सैम्पल लेने का प्रयास करना पड़ता है।
सूत्रों का कहना है कि अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर रैपिड किट के माध्यम से जांच करेगाा। किट के माध्यम से संदिग्धों की जांच होने से उन्हें अस्पताल में क्वारंटाइन कर लिया जाएगा। इसके बाद पीसीआर जांच के लिए नमूना लिया जाएगा। यह जांच भी मेडिकल कॉलेज में शुरू होने वाली है।
संक्रमण कितना पुराना यह भी मिलेगी जानकारी
किट से ये भी पता चलेगा कि कोरोना वायरस का संक्रमण हुए कितने दिन हो गए हैं। 7 से 10 दिन बाद शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली एंटीबॉडी बनाने लगती है, इसका पता आइजीएम टेस्ट से संभव होगा। 15 से 20 दिन बाद लंबे समय का एंटीबॉडी बनने का पता आइजीजी टेस्ट से लग जाएगा।
इसका रखते है ध्यान
लैब टेक्नीशियन ने बताया कि किसी भी संदिग्ध कोरोना रोगी का जांच करने से पहले उन्हें पर्सनल प्रोटक्शन इक्किपमेंट (पीपीई) किट और मास्क पहनने और उतारने की जानकारी अच्छी तरह से दी जाती है। उन्हें इसका प्रशिक्षण भी दिया कि कभी भी ग्लब्स, पीपीई और मास्क झटके से नहीं उतारें तथा जमीन पर भी नहीं फेंके। ऐसा करने से वायरस हवा में फैल सकता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है। हाथ की सफाई और बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोज करने की विधि भी बताई। इस नियम का हर लैब टेक्नीशियन पूरी पालना कर रहा है।
Updated on:
02 Apr 2020 12:05 pm
Published on:
02 Apr 2020 07:49 am
