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डेढ़ लाख की घूस लेते भाजपा पार्षद और पति गिरफ्तार, नगर परिषद में मचा हड़कंप

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्रथम शाखा ने बुधवार को भीलवाड़ा के वार्ड नम्बर 29 की भाजपा पार्षद लक्ष्मीदेवी सेन और उसके पति मुकेश सेन को डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

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Woman councilor and husband arrested for taking bribe in bhilwara

भीलवाड़ा. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्रथम शाखा ने बुधवार को भीलवाड़ा के वार्ड नम्बर 29 की भाजपा पार्षद लक्ष्मीदेवी सेन और उसके पति मुकेश सेन को डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। पार्षद पति ने रिश्वत में एक लाख बीस हजार का चेक और तीस हजार रुपए नकद लिए। ठेकेदार से नाला निर्माण शुरू करने की एवज में रिश्वत ली थी। कार्रवाई से नगर परिषद में हड़कम्प मच गया।

एसीबी के एएसपी बृजराजसिंह को महालक्ष्मी कंस्टे्क्शन कम्पनी के ठेकेदार ने शिकायत दी थी कि उसकी फर्म को काशीपुरी में विष्णु जलपान गृह रोड पर नाला निर्माण के लिए 21 लाख 52 हजार रुपए का कार्यादेश जारी हुआ। कार्य शुरू करने से पहले पार्षद और पति ने डेढ़ लाख रुपए रिश्वत में मांगे। एसीबी ने सत्यापन कराया तो शिकायत सही मिली। रिश्वत की राशि बुधवार को देना तय हुआ।

मुख्य सड़क पर ली रिश्वत
निरीक्षक नरसीलाल मीणा की अगुवाई में एसीबी ने जाल बिछाया। परिवादी ने रिश्वत के लिए पार्षद पति मुकेश को बुलाया। काशीपुरी रोड पर विष्णु जलपान के बाहर बाइक पर पार्षद पति मुकेश पहुंचा। ठेकेदार ने एक लाख बीस हजार का चेक और तीस हजार रुपए नकद मुकेश को दे दिए। मुकेश ने रिश्वत में चेक और नकद बाइक की टंकी के कवर में रख लिए। इशारा मिलते ही एसीबी ने मुकेश को पकड़ लिया। हाथ धुलाने पर केमिकल निकल आया। टीम में एएसआई रामपाल तेली, देवीलाल जंगलिया, दलपतसिंह, हेमेन्द्रसिंह, किशोरसिंह तथा श्रवण मीणा शामिल थे।

घर पर निगरानी, ट्रेप होते पकड़ लाई
ट्रेप से पहले एसीबी ने दो टीमें बनाई थी। पहली टीम मुकेश को ट्रेप करने गई तो दूसरी पार्षद लक्ष्मी के वकील कॉलोनी में किराए के मकान के बाहर निगरानी रख रही थी। जैसे ही मुकेश एसीबी के हत्थे चढ़ा, मकान के बाहर निगरानी कर रही दूसरी टीम ने पार्षद लक्ष्मी को गिरफ्तार कर अजमेर रोड पर एसीबी कार्यालय ले गई। उसके मकान की तलाशी भी ली गई। हालांकि कुछ खास नहीं मिला।

कर्मचारी नदारद, हरकत में पार्षद
एसीबी की कार्रवाई के बाद परिषद में हड़कम्प मच गया। परिषद के कई कर्मचारी कार्रवाई की भनक लगते ही सीट छोड़कर चले गए। उधर, लामबद्ध पार्षदों ने सभापति के कक्ष में बैठक की। ठेकेदारों के खिलाफ पूर्व में कराए कामों की जांच की मांग की।