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विद्यालय विकास में भामाशाह से 27 लाख का करवाया काम, एक हजार पौधे लगाए

- भूगोल प्राध्यापक उपाध्याय को मिलेगा आज मिलेगा गौरव

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Work worth 27 lakhs was done from Bhamashah for school development, one thousand saplings were planted

Work worth 27 lakhs was done from Bhamashah for school development, one thousand saplings were planted

शिक्षक दिवस पर इस बार भीलवाड़ा जिले का नाम रोशन होगा। सुवाणा ब्लॉक की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पांसल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं भूगोल प्राध्यापक अनिल कुमार उपाध्याय को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर सम्मानित करेंगे। यह सम्मान न केवल उपाध्याय के लिए, बल्कि पूरे जिले की शिक्षा संस्कृति के लिए गौरव की बात है। मूलतः मांडल तहसील के हिसनियां निवासी अनिल उपाध्याय का जीवन संघर्षों से भरा रहा। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षा को जीवन का ध्येय बनाया।

विद्यार्थियों में भूगोल विषय के प्रति नई दृष्टि

भूगोल विषय को रोचक बनाने में उन्होंने मानचित्र कला, मॉडल्स और नवाचारी शिक्षण पद्धतियां अपनाईं। स्कूल में ई-पुस्तकालय और आईटीसी लैब स्थापित कर छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा। परिणाम हमेशा शत-प्रतिशत रहा। विद्यार्थियों में भूगोल विषय के प्रति गहरी रुचि और जिज्ञासा जगाई। भामाशाहों को प्रेरित कर विद्यालय को नवीन भवन और परिसर दिलवाया। मुख्य द्वार, टॉयलेट, पेयजल, पार्क, स्टेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगवाए। 107 नए छात्रों का नामांकन कर शिक्षा का दायरा बढ़ाया। स्वयं की देखरेख में 1000 पौधे लगाए, जो आज हरे-भरे वृक्ष बन चुके हैं। अब तक भामाशाहों से 27 लाख रुपए से अधिक का विकास कार्य करवा चुके हैं।

विद्यार्थी और अभिभावकों से आत्मीय रिश्ता

हर छात्र के अभिभावक से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं और उनकी स्थिति को समझते हैं। जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्वयं शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराते हैं। हर बच्चा मेरा अपना परिवार है, यही सोच उन्हें खास बनाती है। उपाध्याय ने बताया कि मेरे कॉलेज समय के गुरु प्रो. श्यामसुंदर भट्ट, प्रो. राजकुमार चतुर्वेदी, प्रो. जयदीप सिंह और प्रो. संतोष आनंद ने मुझे भूगोल विषय के प्रति प्रेरित किया। अगर उनका मार्गदर्शन न मिला होता तो आज मैं इस मुकाम पर नहीं होता।