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सीएम राइज स्कूलों की आड़ में 120 विद्यालय बंद, शिक्षकों ने जताया विरोध

CM Rise schools: मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले में बीते चार सालों में 120 प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल बंद कर दिए गए। सीएमराइज स्कूलों की स्थापना के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे स्कूलों पर ताला लग रहा है।

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भिंड

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Akash Dewani

Mar 20, 2025

120 schools closed under the guise of CM Rise schools in bhind district of mp

CM Rise schools: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालय एक किलोमीटर की परिधि में और माध्यमिक विद्यालय तीन किलोमीटर की परिधि में होना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, भिण्ड जिले में इस नियम को दरकिनार कर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को लगातार बंद किया जा रहा है।

4 सालों में 120 स्कूलों हुए बंद

जिले में बीते चार वर्षों में 120 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। इन विद्यालयों के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, सीएम राइज स्कूल शुरू होते ही उनके 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों पर ताला लग सकता है। आगामी सत्र में भी कुछ और स्कूलों को बंद किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि सीएम राइज स्कूलों की आड़ में आरटीई नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में संचालित छोटे स्कूलों को बंद करने से बच्चों की शिक्षा बाधित होगी, जिससे शाला त्याग की समस्या बढ़ सकती है।

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कम छात्र संख्या का दिया गया हवाला

शासन के नियमों के अनुसार, यदि किसी विद्यालय में 10 से कम छात्र होते हैं तो उसे बंद कर दिया जाता है। इसी आधार पर जिले में कई विद्यालयों पर ताला लग चुका है। इस वर्ष भी रौन क्षेत्र के मसेरन की खोड़ सहित दो स्कूलों को बंद कर दिया गया है। वर्ष 2020 में एक साथ 100 संस्थानों को बंद किया गया था, जिनमें छात्रों की संख्या पांच से भी कम पाई गई थी।

दस नए सीएम राइज स्कूल होंगे शुरू

इस बीच, जिले में दस नए सीएम राइज स्कूल खोले जाने की योजना है। इनमें शामिल हैं—

  • शासकीय एक्सीलेंस हायर सेकंडरी स्कूल, रौन
  • शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल, मिहोना
  • शासकीय बालक हायर सेकंडरी स्कूल, आलमपुर
  • शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल, फूप
  • शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल, अकोड़ा
  • शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल, दबोह
  • शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल, अटेर
  • शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल, मालनपुर
  • शासकीय बालक हायर सेकंडरी स्कूल, आलमपुर
  • शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल, आलमपुर

इन स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और शिक्षकों को निर्देशित किया जा रहा है। नवीन सत्र में ये विद्यालय प्रारंभ किए जाएंगे।

वाहन सुविधा की कमी

शासन ने साल 2023 में सीएमराइज स्कूलों के लिए वाहन सुविधा देने की घोषणा की थी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई, लेकिन कोई ऑपरेटर सामने नहीं आया। पहले यह टेंडर प्रति छात्र 1000 रूपए के मान से जारी किया गया था, जिसे साल 2024 में बढ़ाकर 2,000 रूपए कर दिया गया। बावजूद इसके, अब तक कोई ऑपरेटर सामने नहीं आया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, साल 2025 में चौहो, कनावर और गोहद के सीएम राइज स्कूलों में वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, अन्य स्कूलों में खुद के परिसर न होने के कारण वाहन सुविधा नहीं दी जा सकेगी।

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इन सीएमराइज स्कूलों को मिलेगा भवन

भिण्ड जिले के गोहद, कनावर, चौहो, अमायन, लहार, भिण्ड और मेहगांव में संचालित सीएमराइज विद्यालयों की कक्षाएं अभी पुराने भवनों में संचालित की जा रही हैं। इनमें से गोहद, कनावर और चौहो के सीएम राइज स्कूलों के भवन निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, और नवीन सत्र में इन्हें अपने नए भवन मिल जाएंगे। इन विद्यालयों में छात्रों के लिए वाहन सुविधा भी उपलब्ध होगी।

लहार, मेहगांव और अमायन में भवन निर्माण कार्य जुलाई 2025 तक पूरा होने की संभावना है। हालांकि, जिला मुख्यालय पर सीएम राइज स्कूल के लिए दो साल पहले भूमि चिन्हित कर ली गई थी, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। पहले इसके लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसे अब बढ़ाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

शिक्षक संगठनों का विरोध

शिक्षक संगठनों का कहना है कि सीएम राइज स्कूलों के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे स्कूलों को बंद करना अनुचित है। आजाद अध्यापक संघ भिण्ड के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष संतोष लहारिया ने कहा, इस तरह के फैसले से बच्चों की शिक्षा बाधित होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में शाला त्याग की समस्या बढ़ेगी।

शासन की सफाई

इस विषय पर जिला शिक्षा अधिकारी आरडी मित्तल का कहना है,सीएम राइज स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी। जब बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो छात्र इन्हीं स्कूलों में पढ़ने आएंगे। इस दायरे में आने वाले स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होने पर उन्हें बंद किया जाएगा।

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