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आठ साल से खड़े सवा करोड़ के फायर चेसिस, खुले में हो रहे कबाड़

आठ साल में प्रदेश में सरकार बदली, संयुक्त अलवर जिला और खैरथल जिले में दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी बदले लेकिन नहीं बदला फायर चेसिस का हाल। करीब आठ साल से फायर टेंडर निर्माण के लिए खड़े चेसिस अब कबाड़ हो चुके हैं।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

May 02, 2026

विभागों की आपसी उलझन में राजस्व का हुआ नुकसान, सरकार बदली, अधिकारी भी चले गए, नहीं बदले हालात

भिवाड़ी. आठ साल में प्रदेश में सरकार बदली, संयुक्त अलवर जिला और खैरथल जिले में दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी बदले लेकिन नहीं बदला फायर चेसिस का हाल। करीब आठ साल से फायर टेंडर निर्माण के लिए खड़े चेसिस अब कबाड़ हो चुके हैं। विभागीय अधिकारी भी इन्हें अब किसी उपयोग लायक नहीं मान रहे हैं। नगर परिषद ने मई 2018 में टेंडर जारी कर दमकल वाहनों के लिए छह नए चेसिस खरीदे थे। बीएस फॉर फायर चेसिस खरीदने के बाद इनमें फायर टेंडर निर्माण के बाद पंजीयन नंबर प्राप्त करने थे लेकिन नगर परिषद को बीडा ने राशि स्वीकृत नहीं की, जिसकी वजह से चेसिस खड़े रहे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बीएस फॉर वाहनों के पंजीयन पर रोक लगा दी। नगर परिषद ने क्षेत्र में आग बुझाने के लिए बीडा द्वारा दिए गए फायर सेस के 1.20 करोड़ रुपए से फायर चेसिस खरीदे थे। फायर चेसिस खरीदने के बाद परिषद ने फायर सेस कोष से ही इन चेसिस के ऊपर फेब्रिकेशन का काम कराने के लिए बीडा से राशि मांगी लेकिन राशि नहीं मिली, जिसकी वजह से इन फायर चेसिस का पंजीयन नहीं हो सका। तभी से ये फायर चेसिस नगर परिषद के अग्निशमन केंद्र में खड़े हुए हैं। पहले ये फायर चेसिस स्टेशन के अंदर छांव में खड़े थे लेकिन नगर परिषद को डीएलबी से हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और अन्य दमकल वाहन मिल जाने के बाद उन्हें छत के नीचे खड़ा किया जाने लगा है। करीब तीन साल से ये चेसिस खुले में खड़े होने की वजह से खराब हो रहे हैं। अग्निशमन केंद्र में जहां इन फायर चेसिस को खड़ा किया गया है, वहां पर अब घास-फूस भी फायर चेसिस के बराबर उग आई है।

एक्सचेंज भी नहीं हुआ
इन चेसिस का उपयोग करने के लिए कई स्तर पर जुगाड़ लगाए गए लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। उद्योग विभाग ने राज्य स्तर पर बड़ी संख्या में फायर टेंडर खरीदने की तैयारी थी, इन फायर चेसिस को एक्सचेंज करने के लिए नगर परिषद से तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई थी। बीएस फॉर के फायर चेसिस कंपनी को वापस देने की तैयारी की जा रही थी लेकिन वहां भी बात नहीं बन सकी।

5.81 करोड़ से होने थे तैयार
दमकल के छह चेसिस में 5.81 करोड़ रुपए का फेब्रिकेशन काम होना था। इस राशि से दमकल वाहनों में आग बुझाने के उपकरण लगाए जाने थे, जिससे कि इन चेसिस को आधुनिक तरीके से आग बुझाने के लिए उपयोग किया जा सके। लेकिन बीएस फॉर के पंजीयन नहीं होने की वजह से ये वाहन अग्निशमन शाखा में ही खड़े रह गए।

नहीं हो सका पंजीयन
बीडा ने फायर सेस का पैसा नगर परिषद को दिया, जिससे परिषद ने चेसिस खरीदे। चेसिस खरीदने के बाद इनका फेब्रिकेशन होना था, फेब्रिकेशन के लिए बीडा ने पैसा नहीं दिया, फायर टेंडर की बॉडी का निर्माण हुए बिना पंजीयन नंबर नहीं मिल सकता था, और बाद में न्यायालय ने बीएस फॉर की गाडिय़ों पर ही रोक लगा दी।

फायर चेसिस के उपयोग और कबाड़ नीलामी करने को लेकर डीएलबी को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। दो महीने पहले भी पत्र लिखा है। कोई जबाव नहीं आया है।
नरेश मीणा, अग्निशमन अधिकारी