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Ravi Kishan Birthday: खाने के लिए घर में रोटी नहीं, चमड़े की बेल्ट से पिटाई खाते थे रवि किशन, 34 साल बाद मिला वो मुकाम

Ravi Kishan: गोरखपुर सांसद रवि किशन 57वें जन्मदिन पर 17 जुलाई को तारा रिजॉर्ट, खोराबार में भव्य भोज देंगे। सुबह 11 से शाम 4 बजे तक सभी शहरवासियों को शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। इस खास मौके पर चलिए उनकी लाइफ से जुड़ी अहम बातों को बताते हैं।
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मुंबई

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Saurabh Mall

Jul 16, 2026

RAVI KISHAN

अभिनेता और गोरखपुर के सांसद रवि किशन (सोर्स: ANI)

Ravi Kishan 57th Birthday: आज रवि किशन भोजपुरी सिनेमा के बड़े स्टार हैं। गोरखपुर से सांसद भी हैं। करोड़ों लोग उनके चाहने वाले हैं। लेकिन उनकी जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब घर में खाने तक के पैसे नहीं थे। पिता की डांट और चमड़े की बेल्ट से पिटाई झेलनी पड़ी। मुंबई में भूखे रहकर संघर्ष किया। कई बार मजाक बना। फिर भी हार नहीं मानी। 34 साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें वह मुकाम मिला, जिसकी उन्होंने बचपन में कल्पना की थी। 17 जुलाई को अपने 57वें जन्मदिन पर रवि किशन गोरखपुर के लोगों के लिए विशेष भोज का आयोजन भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की कहानी।

चमड़े की बेल्ट से पिटाई, लेकिन नहीं टूटा सपना

रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई की एक चॉल में हुआ था। उनका असली नाम रविंद्र श्याम नारायण शुक्ला है। उनके पिता पुजारी थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। बचपन से ही रवि किशन को एक्टिंग का शौक था। एक बार गांव की रामलीला में उन्होंने मां की साड़ी पहनकर सीता का किरदार निभाया। यह बात उनके पिता को पसंद नहीं आई। गुस्से में उन्होंने रवि किशन की चमड़े की बेल्ट से पिटाई कर दी। पिता चाहते थे कि बेटा फिल्मों से दूर रहे। लेकिन रवि किशन ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनकी मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

500 रुपये लेकर पहुंचे मुंबई

महज 17 साल की उम्र में रवि किशन जेब में सिर्फ 500 रुपये लेकर मुंबई पहुंच गए। शुरुआती दिन बेहद मुश्किल थे। छोटी-सी चॉल में रहते थे। कई बार पेट भर खाना भी नसीब नहीं होता था। ऑडिशन के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते थे। छोटे-छोटे रोल करते हुए उन्होंने बॉलीवुड में जगह बनाने की कोशिश की। बाद में भोजपुरी फिल्मों का रुख किया। 'सैयां हमार' जैसी फिल्मों ने उनकी किस्मत बदल दी। इसके बाद वे भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। आज उन्हें भोजपुरी के अमिताभ बच्चन के नाम से भी जाना जाता है।

34 साल बाद मिली पहचान

रवि किशन ने कई इंटरव्यू में बताया है कि 90 के दशक में कई स्टार कलाकार उनका मजाक उड़ाते थे। वे खुद को हर तरह से तैयार कर चुके थे। थिएटर किया। डांस सीखा। घुड़सवारी सीखी। हिंदी और उर्दू पर मेहनत की। फिर भी सफलता उनसे दूर रही। उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। उनका मानना था कि हर इंसान का समय जरूर आता है। आखिरकार 34 साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई। उन्हें बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड मिलने लगे। 'लापता लेडीज' और 'खाकी: द बिहार चैप्टर' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक दमदार अभिनेता के रूप में नई पहचान दिलाई।

सांसद बनने के बाद भी जमीन से जुड़े

आज रवि किशन अभिनय के साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं। वह भारतीय जनता पार्टी से गोरखपुर के सांसद हैं। हाल ही में लोकसभा में उन्होंने कहा था कि वह अपनी पत्नी के पैर छूते हैं। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में उनकी पत्नी ने हर मुश्किल में उनका साथ दिया। इसलिए वह उन्हें सम्मान देते हैं।