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Pakistan Fuel Crisis: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग, जानिए भारत में क्या है स्थिति?

Fuel Crisis: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल को लेकर हाहाकार मची हुई है। कीमतों में सीधे 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। फ्यूल संकट का खतरा लगातार बढ़ा हुआ है। भारत में क्या है स्थिति चलिए जानते हैं।
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भारत

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Saurabh Mall

Jul 16, 2026

India-Pakistan Fuel Crisis Latest Update

पाकिस्तान में फ्यूल संकट का खतरा बढ़ा। तेल के दामों में भारी उछाल। (सोर्स: ANI)

Pakistan Fuel Crisis Latest Update: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने एक बार फिर फ्यूल के दाम बढ़ा दिए हैं। महंगाई से जनता परेशान है। वहीं दूसरी ओर, भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण भारत में इसका असर देखने को मिला। कीमतों में भारी उछाला आया। 10 से 12 रूपये रेट बढ़ गए।

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल महंगा

‘Dwan’ के रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और क्षेत्रीय तनाव का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। 11 जुलाई 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, पेट्रोल 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है।

अब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 310.71 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे ईंधन की वजह से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

अगर भारत की बात करें तो 16 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। भारत में ईंधन की कीमतें राज्य के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, क्योंकि हर राज्य में वैट की दर अलग होती है। फिलहाल देश के अधिकांश शहरों में कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

कीमतों के साथ अब फ्यूल संकट का भी खतरा

पाकिस्तान की मुश्किल सिर्फ महंगे पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है। देश में फ्यूल सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल का उपलब्ध स्टॉक घटकर करीब 3.79 लाख टन रह गया है। मौजूदा खपत के हिसाब से यह लगभग दो सप्ताह की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

जुलाई के पहले पेट्रोल की मांग उम्मीद से ज्यादा रही। लोगों को आशंका थी कि कीमतें और बढ़ सकती हैं, इसलिए खरीदारी तेज हो गई। दूसरी ओर, तय समय पर ईंधन आयात नहीं होने से स्थिति और मुश्किल बन गई। हालांकि करीब 1.53 लाख टन पेट्रोल लेकर कुछ जहाज आने वाले हैं, लेकिन पहले से प्रस्तावित कुछ आयात रद्द होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है।

होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंडेब क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी पड़ रहा है। इससे तेल की ढुलाई महंगी हुई है। वहीं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि सरकार की ओर से बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण नए आयात के लिए वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। कस्टम क्लियरेंस में देरी भी सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है। फिलहाल डीजल का स्टॉक बेहतर बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो पेट्रोल की उपलब्धता पर और दबाव बढ़ सकता है।