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कोचिंग के 1.50 लाख बच्चों को चाहिए हॉस्टल और अच्छा खानपान

800 कोचिंग में 2.5 लाख विद्यार्थी, सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं, भोपाल बना कोचिंग हब: 1.50 लाख छात्र भोपाल से बाहर के, हॉस्टल से लेकर खानपान और सुविधाओं की दरकार

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भोपाल. कोचिंग हब के तौर पर उभरती राजधानी के छोटे- बड़े 800 कोचिंग संस्थानों में ढाई लाख से अधिक छात्र पढ़ते हैं, लेकिन स्थानीय निकाय- प्रशासन इनकी सुविधा- सुरक्षा के लिए कुछ नहीं कर रहा। एमपी नगर में ही स्थिति ये है कि छात्रों को रहने, खाने-पीने से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक के लिए परेशान होना पड़ता है। स्थिति ये है कि इतनी बड़ी संख्या में बाहरी व स्थानीय छात्र होने के बावजूद निगम प्रशासन या जिला प्रशासन की किसी योजना में ये नजर नहीं आते।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भोपाल की स्थानीय प्रशासन- जिला प्रशासन और पुलिस बल इन छात्रों की सुविधा और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में रखें व विशेष योजनाओं से इन्हें राहत दें तो भोपाल की अर्थव्यवस्था में इनका बड़ा योगदान हो सकता है। भोपाल में बड़ी कोचिंग की बात करें तो संख्या 580 है। इन कोचिंग में 60 फीसदी बाहरी यानि शहर से बाहर के छात्र हैं। ऐसे में इन पर विशेष ध्यान देकर योजना बनाने की जरूरत है। कोचिंग के इन 1.50 लाख बच्चों को हॉस्टल और अच्छा खानपान चाहिए।

हॉस्टल नहीं, रहना-खाना सबसे महंगा
एमपी नगर की एक कोचिंग से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे शुभम गुप्ता का कहना है कि मैं एक साल पहले यहां आया था। मेरा रहने ओर खाने का ही आठ हजार रुपए खर्च हो रहा है। हॉस्टल में जगह ही नहीं मिल पाती। एमपी नगर के आसपास की कॉलोनियों में किराया काफी महंगा है। प्रशासन की यहां कोई भूमिका नहीं दिखती। इसी तरह यहां कोचिंग में पढ़ाई करने वाली ज्योति वर्मा का कहना है कि कोचिंग तो ठीक है, पढ़ाई भी अच्छी होती है, लेकिन रहने और खाने-पीने में होने वाले खर्च ने पूरे परिवार का बजट बिगाड़ रखा है। पढ़ाई जरूरी है, इसलिए समय तो निकालना ही होगा।

न हॉस्टल के मानक और न मॉनीटरिंग
शहर में 500 से अधिक हॉस्टल है। इसमें 252 तो गर्ल्स हॉस्टल ही हैं। हॉस्टल के लिए स्थानीय स्तर पर कोई मानक या मॉनीटरिंग तय नहीं है। टैक्स वसूली के अलावा कोई अन्य काम नहीं किया जाता। कुछ आगजनी की घटनाओं और हॉस्टल से जुड़े मामलों मे प्रशासन ने कुछ जांच पड़ताल की थी, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं है। मौजूदा स्थिति ये है कि निगम के पास हॉस्टल का रिकॉर्ड तक नहीं है।

इन पर काम करने की जरूरत
एमपी नगर जैसे कोचिंग के सबसे बड़े गढ में कोचिंग में पढऩे वालों के लिए विशेष पार्किंग होनी चाहिए।
छात्रों के लिए विशेषतौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करना चाहिए।
छात्रों को उचित दर में खानपान की सुविधा की जरूरत।
हॉस्टल के लिए अलग से निगम में सेल बनाकर यहां पंजीयन और मॉनीटरिंग की व्यवस्था की जरूरत।

कोचिंग एसोसिएशन भोपाल के अध्यक्ष संजय तिवारी बताते हैं कि कोचिंग में इस समय ढाई से तीन लाख छात्र हैं। कोरोना के बाद फिर से इनमें बढ़ोतरी हुई है और आगामी समय में आंकड़ा चार लाख छात्रों का होगा। इन्हें पार्किंग, सफाई, सुरक्षा जैसी सुविधाओं के साथ रहने और खाने-पीने की सुविधाएं भी बेहतर मिलें, इसके लिए काम करने की जरूरत है।

इधर भोपाल की महापौर मालती राय के मुताबिक भोपाल शैक्षणिक क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। शहर व इससे बाहर के छात्रों के अध्ययन का बड़ा केंद्र है। इनकी सुविधाओं को निगम प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तय करता है। इस पूरे मामले में हम संबंधित अफसरों से समीक्षा कर छात्रों के हित में योजना बनाएंगे।