
Which train is fastest in India?
शताब्दी से तीन घंटे पहले पहुंचेगी हाईस्पीड ट्रेन
भोपाल। मध्यप्रदेश को जल्द ही नई ट्रेन की सौगात मिलने वाली है। दिल्ली से भोपाल के बीच हाईस्पीड ट्रेन चलने वाली है जो शताब्दी से तीन घंटे पहले ही आपको पहुंचा देगी। इसका ट्रायल रन भी जल्द होने वाला है।
मध्यप्रदेश को राजधानी दिल्ली से जोड़ने वाली यह हाईस्पीड ट्रेन जनवरी से चलने लगेगी। हाल ही में इसके तीन ट्रायल हो गए हैं। इसे ट्रेन-18 नाम दिया गया है। यह 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी और शताब्दी से पहले ही आपको पहुंचा देगी। गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक रफ्तार में चलने वाली ट्रेनों में अब तक राजधानी, शताब्दी और गतिमान का नाम शामिल है।
5 घंटे में भोपाल से दिल्ली पहुंचाएगी ट्रेन-18
भोपाल-दिल्ली के बीच शुरू होने वाली यह ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस को रिप्लेस कर देगी। ट्रेन-18 नामक सेमी हाईस्पीड ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। ट्रेन का ट्रायल रन अगले माह से भोपाल-दिल्ली के बीच होगा।
पूरी तरह से भारतीय ट्रेन
इस ट्रेन की खास बात यह भी है कि इस ट्रेन को मेक इन इंडिया के तहत बनाया गया है। इसका 80 फीसदी मटेरियल भारती है। जबकि जो मटेरियल बाहर से मंगाया गया है, वो भारत में उपलबध नहीं होता है।
-इसके प्रति कोच की कीमत 6 करोड़ रुपए आई है। जबकि विदेशों में इस कोच की कीमत 14 करोड़ रुपए तक होती है।
ऐसे हैं इसके फीचर्स
इसके नए फीचर्स से रेल यात्रियों को खास सुविधाएं मिलेंगी।
-इसके दरवाजों में स्लाइडिंग स्टेप लगाए गए हैं, जो पहली बार किसी ट्रेन में इस्तेमाल हो रहे हैं। यह आटोमेटिक रहेंगे, जो ट्रेन के रुकने के साथ ही स्लाइड होकर बाहर निकल जाएंगे। यानी आप उतरने के लिए तैयार हैं। जबकि ट्रेन के आगे घिसकते ही यह वापस भीतर की तरफ बंद हो जाएंगे। इस स्लाइडिंग स्टेप से प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच का गेप भी खत्म हो जाएगा। यानी गेट और प्लेटफार्म से किसी के गिरने का खतरा नहीं रहेगा।
कोई खराबी हुई तो कंप्यूटर बताएगा जानकारी
यह हाईस्पीड ट्रेन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड बनाई गई है। इसके मल्टीपल स्क्रीन से सूचना मिलती रहेगी। मसलन किसी कोच में ब्रेक कम लग रहे हैं या जाम हो रहे हैं तो ड्राइवर को तुरंत पता चल जाएगा कि खराबी कहां आ रही है। इसके बाद कंट्रोल रूम तक अलर्ट पहुंच जाएगा।
-इसी तरह किसी कोच में सवारी कम हैं तो वहां एसी का तापमान बढ़ जाएगा और जहां पर अधिक हैं, वहां कम हो जाएगा। इसके अलावा एसी का चैंबर ऐसा डिजाइन है, जिससे सीधे ठंडी हवा सीधे सवारी पर नहीं पड़ेगी। लेकिन पूरा कोच एक जैसा कूल रहेगा।
Published on:
23 Sept 2018 09:30 am
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