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स्मार्ट फोन नहीं दिलाने पर राजधानी में 12 साल के बच्चे ने लगाया फंदा

पिता ने 1500 रुपए देकर कहा था-मोबाइल के बदले कपड़े खरीद लो

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स्मार्ट फोन नहीं दिलाने पर राजधानी में 12 साल के बच्चे ने लगाया फंदा

भोपाल। अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में एक 12 साल के बच्चे ने स्मार्ट फोन नहीं मिलने पर किचन में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड के लिए उसने किचन में रखे बिस्तर पर चार फीट की अलमारी रखी और उसके ऊपर चढकऱ कुंडी में फंदा बनाकर झूल गया। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में मोजम्मिल पिता मुकीत अंसारी (12) आठवीं में पढ़ता था।

वह चार दिन से मोबाइल के लिए जिद कर रहा था। पिता ने उसे समझाया लेकिन वो नहीं माना। इस पर थक हारकर पिता ने उसे 1500 रुपए दिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल मत खरीदो इससे कपड़े खरीद लेना लेकिन वो नहीं माना। शुक्रवार को परिवार के लोग अपने काम में व्यस्त थे इस दौरान वो किचन में गया और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मां जब किचन में गई तो बेटे को फंदे पर लटका देख अचेत हो गई। उसके बाद परिवार के लोगों ने उसे फंदे से नीचे उतारा और अस्पताल लेकर पहुंच जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

दोस्तों के पास मोबाइल देखकर कर रहा था जिद

मोजम्मिल सिवनी में अपने बड़े भाई के यहां रह रहा था। रमजान में वो घर आया था। इसकी दो बड़ी बहनें हैं। मोजम्मिल परिवार में सबसे छोटा था। सिवनी में जहां वो पढ़ता था वहां पर ज्यादातर बच्चे स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते थे। इसलिए भी जिद कर रहा था। पिता महंगा फोन दिलाने में असमर्थ थे लेकिन वह नहीं समझा और आत्महत्या कर ली।

हाथ पर 200 से ज्यादा कट के निशान

एएसआई कमल सिंह का कहना है कि जांच के दौरान चला है कि मृतक छात्र मोजम्मिल काफी जिद्दी स्वभाव का था। वह जिस चीज की जिद्द कर ली उसको पूरा करवाकर ही मानता था। चेक करने पर उसके एक हाथ की कलाई पर 200 के करीब कट के निशान हैं। घर वालों का कहना है कि जिद के दौरान वह हाथ पर ब्लेड से कट कर लेता था। मामले की जांच चल रही है।

कुंठा के शिकार हो रहे छोटे-छोटे बच्चे

बच्चे किसी न किसी बात को लेकर कुंठित रहते हैं। माता-पिता द्वारा बच्चों में बहुत अच्छा देखने की प्रवृत्ति के कारण ये हो रहा है। फ्रस्टेशन निकालने के लिए जब उन्हें मौका नहीं मिलता है तो वो अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं और त्वरित रिएक्शन करते हैं।
-डॉ. विनय मिश्रा, मनोविशेषज्ञ