
सरकार के आंकड़ों से मचा हड़कंप
भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों स्कूली बच्चे गायब हो गए हैं. प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों से ये बच्चे गायब हुए हैं. खुद सरकार के आंकड़ों के अनुसार करीब 14 लाख बच्चे गायब हुए हैं. इन आंकड़ों से हड़कंप मचा हुआ है. इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल छोड़ते गए लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग न तो उन्हें रोक सका, न ही इसके कारणों का पता लगा सका। अब इन बच्चों को तलाश करने के काम में टीचर्स के हाथ पैर फूल रहे हैं.
दरअसल ऐसे बच्चों को शाला त्यागी कहा जाता है. इन बच्चों को तलाशने के लिए गृह संपर्क अभियान शुरु किया गया. अभियान में पता चला कि साढ़े तीन लाख बच्चों के परिवार दूसरी जगह चले गए हैं, लेकिन उन्होंने बच्चों को कहीं भी प्रवेश नहीं दिलाया। इसी तरह 1 लाख 50 हजार बच्चे 18 वर्ष से अधिक उम्र के हो गए हैं जबकि 16 हजार की तो मौत ही हो गई है। यह तथ्य भी सामने आया है कि आठवीं के बाद स्कूल छोड़ने वाले की संख्या अधिक है। इनमें भी छात्राएं अधिक हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि साढ़े 9 लाख बच्चों का सर्वे कर लिया गया है। इनमें 1 लाख से ज्यादा बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए चिन्हित किया गया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद से स्कूल शिक्षा विभाग 14 लाख बच्चों को वापस स्कूल में प्रवेश दिलाने की कवायद में जुट गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 30 जून तक बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया चली। 30 जून के बाद दाखिले से छूटे बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए एक बार फिर से सर्वे कराया जाएगा। इसी तरह प्रवेश प्रक्रिया को बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है।
टीचर्स बताते हैं कि इन 14 लाख बच्चों के स्कूल से गायब होने की सबसे अहम वजह गरीबी है. ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई करने की बजाय रोजी-रोटी जुटाने में लग गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घर से दूर होने के कारण ज्यादातर छात्राएं स्कूल नहीं जा पाती हैं।
Published on:
17 Jul 2022 08:52 pm
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